देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर चल रहे पेपर लीक विवाद पर अब संसद में भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। हाल ही में संसदीय समिति की बैठक में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के अधिकारियों से परीक्षा सुरक्षा, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों को लेकर सवाल पूछे गए। इस दौरान अधिकारियों ने दावा किया कि प्रश्नपत्र लीक एजेंसी की आंतरिक प्रणाली से नहीं हुआ, जबकि मामले की जांच अभी जारी है।
बैठक में शिक्षा मंत्रालय और NTA के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सांसदों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले इस मामले पर चिंता जताई। विपक्षी सांसदों ने परीक्षा संचालन प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग करते हुए कहा कि छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार और एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। इस बार भी करीब 23 लाख छात्रों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। ऐसे में पेपर लीक से जुड़े आरोपों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
संसदीय समिति की बैठक में कई सांसदों ने परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद संभावित कमजोरियों को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया। सुझाव दिया गया कि अलग-अलग राज्यों के लिए अलग प्रश्नपत्र सेट तैयार किए जाएं ताकि किसी एक जगह से पेपर लीक होने की स्थिति में पूरे देश की परीक्षा प्रभावित न हो। कुछ सांसदों ने परीक्षा की समय अवधि और संचालन प्रक्रिया की भी समीक्षा करने की मांग की।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल और तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने के बावजूद बड़े स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लगातार चुनौती बनी हुई हैं। परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और तकनीकी सिस्टम की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर और अधिक सख्ती की जरूरत बताई जा रही है।
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) कर रही है। जांच के दौरान कई राज्यों से आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ ऐसे लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है जिनका परीक्षा प्रक्रिया से सीधा संबंध था। इससे जांच एजेंसियों को पेपर लीक नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दोषियों की गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में दीर्घकालिक सुधार जरूरी हैं। कई विशेषज्ञ ऑनलाइन निगरानी, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र प्रणाली और परीक्षा केंद्रों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे उपायों की वकालत कर रहे हैं।
छात्र संगठनों और अभिभावकों ने भी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनती छात्रों का मनोबल तोड़ती हैं और निष्पक्ष प्रतियोगिता की भावना को नुकसान पहुंचाती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा है। आने वाले समय में सरकार पर परीक्षा सुधारों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार की ओर से यह संकेत दिए गए हैं कि परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए नए कदमों पर विचार किया जा रहा है। खाली पदों को भरने, तकनीकी ढांचे को मजबूत करने और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।








