मुंबई, 6 जुलाई 2026। महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब रेलवे संचालन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह मुंबई और पुणे के बीच देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल कर्जत-लोनावला के भोर घाट सेक्शन में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) होने से रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया। सुरक्षा कारणों से इस मार्ग की सभी तीन रेलवे लाइनों पर ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, लगातार हो रही तेज बारिश के कारण मुंबई मंडल के ठाकुरवाड़ी और मंकी हिल लूप केबिन के बीच पहाड़ी क्षेत्र से मलबा रेलवे ट्रैक पर आ गिरा। यह इलाका भोर घाट का हिस्सा है, जहां मानसून के दौरान अक्सर भूस्खलन की घटनाएं सामने आती हैं। ट्रैक पर मलबा आने के बाद रेलवे ने एहतियातन सभी लाइनों पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
कई महत्वपूर्ण ट्रेनें रद्द
इस घटना के बाद मुंबई और पुणे के बीच चलने वाली कई लोकप्रिय ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। इनमें इंद्रायणी एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, डेक्कन एक्सप्रेस, डेक्कन क्वीन, प्रगति एक्सप्रेस और धुले एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं।
इसके अलावा पुणे से मुंबई आने वाली सिंहगढ़ एक्सप्रेस सहित कई अन्य सेवाओं को भी रद्द किया गया। कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों का मार्ग बदल दिया गया, जबकि कुछ ट्रेनों को बीच रास्ते में ही समाप्त या दूसरे स्टेशन से रवाना करने का फैसला लिया गया। कई ट्रेनों के समय में भी बदलाव किया गया है, जिससे यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाओं में संशोधन करना पड़ा।
बहाली का काम जारी
रेलवे की इंजीनियरिंग और तकनीकी टीमें मौके पर पहुंचकर ट्रैक से मलबा हटाने और लाइन की सुरक्षा जांच में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक इस मार्ग पर ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं किया जाएगा।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। बहाली का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है और मौसम अनुकूल रहने पर जल्द ही सेवाएं बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
यात्रियों को दी गई सलाह
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन की वर्तमान स्थिति अवश्य जांच लें। बिना पुष्टि के स्टेशन पहुंचने से अनावश्यक परेशानी हो सकती है। यात्रियों की सहायता के लिए प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर हेल्पलाइन भी शुरू की गई हैं, जहां ट्रेन संचालन और यात्रा संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
मानसून में बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी घाट का भोर घाट क्षेत्र मानसून के दौरान अत्यधिक संवेदनशील रहता है। लगातार बारिश से पहाड़ियों की मिट्टी ढीली पड़ जाती है, जिससे भूस्खलन की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे मौसम में रेलवे प्रशासन को नियमित निगरानी, ट्रैक निरीक्षण और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना पड़ता है।
यात्रियों पर पड़ा व्यापक असर
मुंबई और पुणे के बीच प्रतिदिन हजारों लोग नौकरी, व्यापार, शिक्षा और अन्य कार्यों के लिए रेल यात्रा करते हैं। ऐसे में ट्रेन सेवाएं बाधित होने से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा और कई लोगों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ा। सड़क मार्ग पर भी अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।
रेलवे अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि स्थिति सामान्य होते ही चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों का संचालन फिर से शुरू किया जाएगा। तब तक यात्रियों से धैर्य बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करने की अपील की गई है।








