बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने भाई शालिग्राम पर फायरिंग और मारपीट के आरोप लगने के बाद पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका अपने भाई या परिवार से कोई संबंध नहीं है और इस मामले में कानून को निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर घटना में उनका नाम जोड़ना उचित नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, जमीन को लेकर हुए विवाद के दौरान एक व्यक्ति पर कथित रूप से हमला किया गया। घायल व्यक्ति की पहचान मोतीलाल कुशवाहा के रूप में हुई है।
मोतीलाल कुशवाहा का आरोप है कि शालिग्राम और उनके साथ मौजूद कुछ अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट की और उन पर पिस्तौल से कई राउंड फायर किए। उनका कहना है कि हमले के दौरान उनके सिर और कान पर भी चोटें आईं।
घटना के बाद घायल को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि उन्होंने तीन वर्ष पहले ही सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि उनका शालिग्राम से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार और जिले में कई लोग रहते हैं, इसलिए किसी भी घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
घायल का क्या आरोप है?
घायल मोतीलाल कुशवाहा का दावा है कि विवाद जमीन को लेकर हुआ था। उनका आरोप है कि शालिग्राम गांव की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई और कथित तौर पर पिस्तौल से तीन से चार राउंड फायर किए गए।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस का क्या कहना है?
छतरपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने घायल का मेडिकल परीक्षण कराया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी
फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फायरिंग और मारपीट के आरोप कितने सही हैं और मामले में किन लोगों की भूमिका रही।








