प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में वैश्विक संघर्षों को लेकर भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध और टकराव किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं दे सकते। विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी सदस्य देशों से एकजुट होकर कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड की जगह नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को इस चुनौती के खिलाफ एक आवाज में खड़ा होना होगा।
युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं: PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। युद्ध से आम लोगों की जिंदगी प्रभावित होती है और वैश्विक स्तर पर आर्थिक एवं मानवीय चुनौतियां बढ़ती हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध के मैदान में किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता। सभी विवादों और संघर्षों को बातचीत, कूटनीति और शांतिपूर्ण माध्यमों से सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक बातचीत पर जोर देता रहा है। SCO के मंच से प्रधानमंत्री का यह संदेश वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भारत की नीति को भी रेखांकित करता है।
आतंकवाद पर PM मोदी की दो टूक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में आतंकवाद को लेकर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते। उनका जोर इस बात पर था कि आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो या कहीं से भी उत्पन्न हो, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उसके खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।
खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे मंच पर आया, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत SCO के कई प्रमुख नेता मौजूद थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सम्मेलन में उपस्थित थे।
भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है। ऐसे में SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आतंकवाद के खिलाफ एक समान नीति की मांग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच SCO बैठक महत्वपूर्ण
SCO शिखर सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। ऊर्जा मार्गों में किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर डाल सकता है और इसका प्रभाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इसके अलावा यूक्रेन युद्ध भी वैश्विक कूटनीति के प्रमुख मुद्दों में बना हुआ है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय माहौल में भारत का संदेश स्पष्ट है कि वैश्विक समुदाय को संघर्षों को बढ़ाने के बजाय संवाद, कूटनीति और सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
भारत का संदेश क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी के SCO संबोधन से भारत की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं सामने आती हैं—
- युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति
- आतंकवाद के खिलाफ बिना दोहरे मानदंड के कार्रवाई
- वैश्विक शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना
SCO जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन के मंच से प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को भी दर्शाता है। भारत एक ओर आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को जरूरी माध्यम बता रहा है।








