सनातन शास्त्र शुद्धि समिति का गठन, पतंजलि में ऐतिहासिक फैसला
हरिद्वार: सनातन परंपरा, संस्कृति और प्राचीन शास्त्रों के प्रामाणिक अध्ययन को लेकर पतंजलि में आयोजित अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन के दूसरे दिन महत्वपूर्ण पहल सामने आई। देशभर से आए संतों, शंकराचार्यों, विद्वानों और विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सनातन शास्त्र शुद्धि समिति के गठन के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से सहमति बनी।
इस पहल के तहत विद्वत परिषद और संत-संन्यासी परिषद के गठन की बात भी सामने आई है। प्रस्तावित व्यवस्था में शास्त्रों और परंपराओं से जुड़े विषयों का अध्ययन विद्वानों द्वारा किया जाएगा, जबकि अंतिम निर्णय संतों और मार्गदर्शक मंडल के विचार-विमर्श के बाद आगे बढ़ाने की बात कही गई।
पतंजलि में सनातन शास्त्र शुद्धि समिति के गठन पर सहमति
सम्मेलन में जगद्गुरु शंकराचार्यों, अखिल भारतीय संत समिति, विभिन्न अखाड़ों और गुरु-परंपराओं के संतों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रस्ताव के अनुसार, समिति के अंतर्गत एक विद्वत परिषद बनाई जाएगी। इसमें आचार्यों, शास्त्रों के जानकारों और अलग-अलग विषयों के विद्वानों को शामिल करने की योजना है। समिति में सिख, जैन और बौद्ध परंपराओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात भी कही गई।
विद्वत परिषद प्राचीन ग्रंथों में समय के साथ हुए कथित प्रक्षेपों, बदलावों और व्याख्याओं से जुड़े विषयों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट संत-संन्यासी परिषद को सौंपेगी। इसके बाद रिपोर्ट का परीक्षण मार्गदर्शक मंडल द्वारा किया जाएगा। विचार-विमर्श और आवश्यक संशोधनों के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
विद्वत परिषद और संत-संन्यासी परिषद की जिम्मेदारी
संत-संन्यासी परिषद के संयोजक की जिम्मेदारी आचार्य महासभा के परमात्मानंद महाराज को सौंपी गई है। वहीं, विद्वत परिषद के संयोजक के रूप में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी का नाम सामने आया है।
समिति के गठन के दौरान स्वामी रामदेव भावुक भी हुए। उन्होंने संतों से कहा कि इस पहल का श्रेय उन्हें नहीं चाहिए, बल्कि उनका उद्देश्य सनातन परंपरा के गौरव को पुनः प्रतिष्ठित करना है।
इस अवसर पर स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा लिखित ग्रंथ ‘वैदिक आख्यान विज्ञान’ का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक सनातन धर्म से जुड़े प्रसंगों और उनके अध्ययन पर आधारित बताई गई।

स्वामी रामदेव ने शास्त्रों के प्रामाणिक अध्ययन पर दिया जोर
सम्मेलन में स्वामी रामदेव ने कहा कि वेद, श्रुति और सनातन परंपरा का प्रामाणिक स्वरूप समाज के सामने होना चाहिए। उन्होंने शास्त्रों से जुड़े विषयों पर अध्ययन, शोध और विद्वानों के मार्गदर्शन की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक डिजिटल माध्यमों और AI टूल्स से प्राप्त जानकारी को भी मूल ग्रंथों और प्रमाणिक संदर्भों के आधार पर परखना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी धार्मिक या ऐतिहासिक विषय पर निष्कर्ष निकालने से पहले संदर्भों की जांच जरूरी है।
स्वामी रामदेव ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था, देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक समरसता से जुड़े विचार भी रखे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के अध्ययन और उसके वैज्ञानिक पक्ष को व्यापक स्तर पर समझाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
आचार्य बालकृष्ण बोले—योजनाबद्ध तरीके से होगा कार्य
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि संतों ने सनातन शास्त्र शुद्धि अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। उन्होंने इस कार्य को प्रमाणिकता, योजना और विद्वानों के सहयोग से पूरा करने की बात कही।
आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, भारतीय इतिहास और शास्त्रों से जुड़े विषयों पर शोध तथा पुनर्विचार का काम पतंजलि योगपीठ में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल में संतों और विद्वानों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहेगा।
संतों और धर्माचार्यों ने समिति के गठन का समर्थन किया
सम्मेलन में कई संतों और धर्माचार्यों ने शास्त्र शुद्धि अभियान की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरु शरणानंद महाराज ने समिति में विषय के जानकार विद्वानों को शामिल करने का सुझाव दिया। श्री मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज ने सनातन परंपरा से जुड़े विषयों पर संतों और आचार्यों के संयुक्त विचार-विमर्श को महत्वपूर्ण बताया।
जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज और ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज ने भी अभियान के समर्थन में अपने विचार रखे। कई संतों ने वीडियो संदेशों के माध्यम से भी समर्थन व्यक्त किया।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सनातन धर्म में समानता और सम्मान के विचार पर जोर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल ने सनातन धर्म की चुनौतियों पर चिंतन और भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत करने की बात कही।

‘वैदिक आख्यान विज्ञान’ पुस्तक का विमोचन
सम्मेलन के दूसरे दिन स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा लिखित ‘वैदिक आख्यान विज्ञान’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित संतों और विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों, शास्त्रों और आधुनिक समय में उनके अध्ययन से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
सम्मेलन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान-विरासत के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा तथा शोध से जोड़ना बताया गया।
सनातन शास्त्र शुद्धि अभियान आगे कैसे बढ़ेगा?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, विद्वत परिषद शास्त्रों और परंपराओं से जुड़े विषयों का अध्ययन करेगी। उसकी रिपोर्ट संत-संन्यासी परिषद के सामने रखी जाएगी और फिर मार्गदर्शक मंडल द्वारा परीक्षण किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में विद्वानों के शोध, मूल ग्रंथों के संदर्भ और संतों के मार्गदर्शन को महत्व देने की बात कही गई है। समिति के गठन से जुड़े प्रस्ताव और आगे की कार्यवाही के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आने पर अभियान की संरचना और जिम्मेदारियों की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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