तो क्या थम जाएगा भारत में एक दिन के लिए रेल का पहिया, ये संघर्ष तो इसी ओर कर रहा इशारा, सरकार की है नजर

35 हजार से अधिक स्टेशन मास्टर 31 मई को लेंगे सामूहिक अवकाश
सात सूत्रीय मांग को लेकर सालों से कर रहे संघर्ष, नहीं हो रही सुनवाई
उत्तराखंड के स्टेशन मास्टरों ने किया सामूहिक अवकाश को लेकर आवेदन

दैनिक समाचार, देहरादून: रेलवे का ब्रांड एंबेसडर (रेलवे का प्रथम व्यक्ति) आखिरकार एक दिन का सामूहिक अवकाश लेने के लिए मजबूर हो रहा है। यदि संपूर्ण भारत के स्टेशन मास्टर 31 मई को सामूहिक अवकाश पर पांच सूत्रीय मांगों को लेकर चले गए तो यकीन जानिए रेल का इस दिन संचालन करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। संपूर्ण भारत के 35 हजार के करीब स्टेशन मास्टरों ने कमर कस ली है। कई महीनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे स्टेशन मास्टरों ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल बजा दिया है और इसी कड़ी में 31 मई को सामूहिक अवकाश लेने जा रहे हैं।
ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन ने स्टेशन मास्टर की समस्याएं समाधान के लिए 31 मई 2022 को एक दिन पूरे भारतवर्ष में छुट्टी लेने का ऐलान किया है। संपूर्ण भारत वर्ष के 35000 स्टेशन मास्टर निम्न मांगों को लेकर के 7 अक्टूबर 2020 से संघर्षरत है
अखिल भारतीय स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन के महासचिव ने रेलवे बोर्ड (सीईओ) के अध्यक्ष को मांगों के साथ एक हड़ताल नोटिस दिया है। मांगें स्टेशन मास्टरों के अलावा अन्य संवर्गों और रेलवे कर्मचारियों से भी संबंधित हैं। सभी मांगें किसी न किसी रूप में सभी रेल कर्मचारियों की भावनाओं को छूती हैं। स्टेशन मास्टर एसोसिएशन में यह निर्णय लंबे संघर्ष के बाद लिया है। एसोसिएशन ने ये भी बताने की कोशिश की है कि उन्होंने वैधानिक तरीके से चरणबद्ध तरीके से अपनी आवाज उठाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

अखिल भारतीय स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन के जोनल अध्यक्ष जीएस परिहार ने दैनिक समाचार को बताया कि प्रथम चरण में एस्मा के पदाधिकारियों की ओर से रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को ई-मेल भेजकर के विरोध जताया गया। दूसरे चरण में पूरे भारतवर्ष के स्टेशन मास्टरों ने 15 अक्टूबर को रात्रि ड्यूटी शिफ्ट में स्टेशन पर मोमबत्ती जलाकर के विरोध प्रदर्शन किया गया। तीसरे चरण का विरोध प्रदर्शन ट्रेन संचालन को सुचारू रूप से रखते हुए 20 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक 1 सप्ताह तक काला बैज लगा कर के ट्रेन संचालन किया गया। श्री परिहार ने बताया कि चौथे चरण का विरोध प्रदर्शन ट्रेन संचालन को सुचारू रूप से रखते हुए 31 अक्टूबर को पूरे भारतवर्ष के स्टेशन मास्टर एक दिवसीय भूख हड़ताल पर रहे। पांचवे चरण में भारतवर्ष के 35000 स्टेशन मास्टर ऑन ड्यूटी एवं ऑफ ड्यूटी प्रत्येक मंडल कार्यालय के सामने ट्रेन संचालन को सुचारू रूप से रखते हुए धरना प्रदर्शन किया। छठवें चरण मैं सभी संसदीय क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा गया एवं रेल मंत्री महोदय को ज्ञापन सौंपा गया। सातवे चरण रेल राज्य मंत्री से मुलाकात करके समस्याओं से अवगत कराया गया। जोनल अध्यक्ष श्री परिहार ने बताया कि अभी तक स्टेशन मास्टरों की सभी डिमांड पेंडिंग में है नाइट ड्यूटी सीलिंग लिमिट के आदेश डीओपीटी से स्वीकृत होकर फाइनेंस में स्वीकृति को लेकर पेंडिंग है इसलिए मजबूरी में केंद्रीय कार्यकारिणी के ने यह कठिन निर्णय लिया है। बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष धनंजय चंद्रात्रे और केन्द्रीय मंत्री पी सुनील कुमार की ओर से मीडिया से भी मोरल सपोर्ट की अपेक्षा की गई है।

एसोसिएशन की 2020 से ये हैं मांगे
1- रेलवे में सभी रिक्तियों को शीघ्र भरा जाए
2-सभी रेल कर्मचारियों को बिना किसी अधिकतम सीमा के रात्रि ड्यूटी भत्ता बहाल करना
3-स्टेशन मास्टरों के संवर्ग में एमएसीपी का लाभ 16.02.2018 के बजाय 01.01.2016 से प्रदान करें।
4-संशोधित पदनामों के साथ संवर्गों का पुनर्गठन करना।
5-ट्रेनों के सुरक्षित और समय पर चलने में उनके योगदान के लिए स्टेशन मास्टरों को सुरक्षा और तनाव भत्ता देना।
6- रेलवे का निजीकरण एवं निगमीकरण रोका जाए
7- न्यू पेंशन स्कीम बंद करके पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए

Dainik Samachaar

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