उत्तराखंड में पहली बार स्पॉट हुआ ‘रेड हेडेड ट्रोगोन’ जंगल की अच्छी सेहत का संकेत

Encountered a beautiful male Red-headed trogon in the best rainforest in China

नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य में सर्वे के दौरान मिला विदेशी नन्हा परिंदा
अब तक सूबे में इसकी मौजूदगी का कहीं भी नहीं था अधिकृत डाटा
जंगल के बेहतरीन हैवीटॉट की ओर इसकी दस्तक करता है इशारा

NAVEEN PANDEY, DEHRADUN: हल्द्वानी से नेपाल की सीमा तक फैले नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य अपने बेहतरीन हैवीटॉट के रूप में अहम पहचान बनाते जा रहा है। वन्य जीवों की चहलकदमी के बीच विविधिताओं से भरे इस घने जंगल में चार चांद उस वक्त लग गया जब विदेशी मेहमान परिंदा ‘रेड हेडेड ट्रोगोन’ को पहली बार स्पॉट किया गया। मुस्कुराने की वजह तब और हो गई जब पक्षी विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्टि कर दी कि उत्तराखंड में पहली बार ‘रेड हेडेड ट्रोगोन’ को स्पॉट किया गया है।
हल्द्वानी वन डिवीजन की ओर से दो से पांच फरवरी तक पक्षियों का सर्वे कराया गया। सर्वे के दौरान डिवीजन के नंधौर रेंज के मछली वन के समीप एक पेड़ पर विदेशी मेहमान परिंदा ‘रेड हेडेड ट्रोगोन’ देखा गया। पक्षी विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्टि की कि यह परिंदा पहली बार उत्तराखंड के वनों में देखा गया है। यह ट्रोगोनाइड पक्षी के परिवार की एक प्रजाति है। जो मध्य नेपाल, दक्षिण पूर्वी एशिया, दक्षिण चीन से सुमात्रा के जंगलों में पाया जाता है। विदेशी परिंदे की विशेषता यह है कि इसका सिर और सीना लाल होता है और यह बेहद खूबसूरत पक्षी है। इसके प्राकृतावास की बात करें तो यह ऊंचाई वाले जंगलों में रहना पसंद करता है। इस मेहमान परिंदे का रिकॉर्ड डिजिटली करने का निर्णय विभाग ने लिया है ताकि इस पक्षी को उत्तराखंड की विदेशी परिंदों की सूची में संरक्षित किया जा सके।

मेहमान परिंदों के साथ कई अति दुर्लभ प्रजाति के परिंदे भी मिले
हल्द्वानी वन डिवीजन में सर्वे के दौरान जहां विदेशी मेहमान पक्षी की पहली बाद दस्तक का रिकार्ड मिला तो वहीं दूसरी ओर 168 प्रवासी व स्थानीय पक्षियों की मौजूद वन में होने का भी सबूत मिला है। इनमें कई प्रजातियां अति दुर्लभ व दुर्लभ श्रेणी की है। सर्वे के मुताबिक एलेक्जेंडरियन पैराकीट, हिमालयन ग्रिफिन, रिवर लैपविंग, व्हाइड रम्पड वल्चर, इजिप्टियन वल्चर, स्टेपी ईगल समेत परिंदे वनों में मिले।

जैव विविधता के लिहाज से यह अच्छा संकेत
नंधौर अभ्यारण्य में मछली वन के समीप ‘रेड हेडेड ट्रोगान’ पक्षी का मिलना यह संकेत करता है कि यह अभ्यारण्य जैव विविधता के लिहाज से बेहद अच्छा है। इन परिंदो के लिए यह जंगल अनुकूल है। ‘रेड हेडेड ट्रोगान’ परिंदा अकेले और जोड़े में रहता है। उत्तरी भारत में मादा अप्रैल से जुलाई के मध्य में अंडे देती हैं।

2012 में अस्तित्व में आया नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य
उत्तराखंड का यह वन्यजीव अभयारण्य 2012 में अस्तित्व में आया। हल्द्वानी वन प्रभाग के गोला और शारदा नदियों के बीच यह जंगल फैला हुआ है। अभयारण्य नेपाल के ब्रम्हदेव, सुखलाफाता वन्यजीव अभ्यारण्यों और रामनगर के पश्चिमी जंगलों और भारत में तराई केंद्रीय वन प्रभाग के बीच की एक कड़ी है। इससे पहले नंधौर एक फारेस्ट रिजर्व था। जिसकी पहचान 2002 के दौरान शिवालिक हाथी रिजर्व के एक अहम हिस्से के रूप में हुई। फिर 2004 में भारतीय वन्यजीव संस्थान ने नंधौर को वन्य जीवों को लेकर बड़ी संभावना के रूप में देखा मान्यता दी और भारत सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय ने 2112 में इसे वन्य जीव अभ्यारण की लिस्ट में सूचीबद्ध किया। यह अभयारण्य तराई आर्क लैंडस्केप का एक हिस्सा है जो भारत में उत्तराखंड से नेपाल तक फैला हुआ है। इस जंगल में 100 से अधिक प्रजातियों के पेड़ों, 30 से अधिक झाड़ियों की प्रजातियों और लगभग 35 प्रजातियों के घास और पर्वतारोहियों का घर है। सरीसृपों की 15 प्रजातियों और मछलियों की 20 प्रजातियों का भी घर है। प्रमुख स्तनधारी प्रजातियों में एशियाई हाथी, तेंदुए, बाघ और भालू भी ​पाए जाते हैं।

Dainik Samachaar

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