उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के लिए बने अस्थाई हेलीपैड पर उतरा था निजी कंपनी का हेलीकाप्टर, नरेन्द्र नगर की अदालत का अब बड़ा फैसला, आरक्षित वन से जुड़ा है मामला

केवल सांकेतिक चित्र

आरक्षित वन क्षेत्र में निजी कंपनी के हेलीकाप्टर उतारने को लेकर 12 साल बाद नरेन्द्र नगर की अदालत ने दिया है अहम फैसला

नरेन्द्र नगर वन प्रभाग अंतर्गत आरक्षित वन क्षेत्र में सीएम के लिए बनाया गया था अस्थाई हेलीपैड
मशहूर आनंदा होटल से मोनार्क इंटरनेशनल कंपनी के हेलीकाप्टर ने किया इसी हेलीपैड पर लैंड
हेलीकाप्टर को वनाधिकारी ने किया था सीज, मालिक, पायलट और जीएम बनाए गए थे आरोपी

BY NAVEEN PANDEY

दैनिक समाचार, देहरादून: नरेन्द्र नगर वन क्षेत्र अंतर्गत आरक्षित वन क्षेत्र में मुख्यमंत्री के लिए बने अस्थाई हेलीपैड पर नई दिल्ली की एक प्राईवेट हेलीकाप्टर कंपनी के हेलीकाप्टर उतारने के मामले में नरेन्द्र नगर की अदालत ने अहम और बड़ा फैसला सुनवाया है। मोनार्क इंटरनेशनल एवियेशन नई दिल्ली अंतर्गत काम करने वाले जनरल मैनेजर और पायलट के खिलाफ न्यायिक दंडाधिकारी शंभूनाथ सेठवाल ने जुर्माने की वसूली के आदेश दिए हैं। इस मामले में कंपनी के मालिक, पायलट और जनरल मैनेजर को आरोपी बनाया गया था।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी ने बताया कि मामला नरेन्द्र नगर वन प्रभाग अंतर्गत शिवपुरी रेंज का है। घटना एक मई 2011 की है जब तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को हेलीकाप्टर से आना था। उनके लिए अस्थाई तौर पर हेलीपैड बनाया गया था। जहां मुख्यमंत्री की अगुवाई के लिए प्रोटोकॉल के तहत जिलाधिकारी, एसएसपी, डीएफओ सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। तभी करीब 11:30 सुबह अचानक एक हेलीकाप्टर दो टूरिस्टों को लेकर अस्थाई रुप से मुख्यमंत्री के लिए बने हेलीपैड पर उतर गया। जिसकी वजह से हड़कंप मच गया। उन्होंने बताया कि जब मालूम किया गया और पॉयलट से जानकारी ली गई तो यह बात सामने आई कि नरेन्द्र नगर के आनंदा होटल से हेलीकाप्टर ने एक टूरिस्ट को लेकर उड़ान भरी थी। मौके पर मौजूद प्रशासनिक और प्रभागीय वनाधिकारी के पूछताछ के दौरान मालूम चला कि ये हेलीकाप्टर मोनार्क इंटरनेशनल एवियेशन नई दिल्ली का है और उसे पॉयलट केके सिंह पुत्र आरबी सिंह निवासी बी-102 हारमोनी अपार्टमेंट द्वारिका सेक्टर 23 नई दिल्ली उड़ा रहे थे। जब पायलट से हेलीकाप्टर की लैंडिंग आदि की अनुमति के बारे में जानकारी मांगी गई तो पायलट ने ऐसे किसी अनुमति के अपने पास होने से इंकार किया। जिस पर उस वक्त नरेन्द्र नगर वन प्रभाग के डीएफओ रहे आरडी पाठक ने हेलीकाप्टर को तत्काल सील करने और अगले आदेश तक हेलीकाप्टर को जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सुपुदर्गी में रखने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इस बीच, मोनार्क इंटरनेशनल एवियेशन कंपनी तक बात पहुंची और कंपनी के जनरल मैनेजर कपिल मिश्रा ने कंपनी की ओर से हेलीकाप्टर बिना अनुमति उतारने को लेकर क्षतिपूर्ति देने की बात कही और दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति तय हुई। इस दौरान मामले में नरेन्द्र नगर वन प्रभाग के शिवपुरी रेंज के रेंजर रहे शरणपाल सिंह ने पायलट केके सिंह, जनरल मैनेजर कपिल मिश्रा और मोनार्क इंटरनेशनल एवियेशन नई दिल्ली कंपनी के मालिक अशोक साहनी निवासी 112 सुंदरनगर नई दिल्ली को भी आरोपी बनाया। मामले में चूंकि लैंडिंग और उड़ान के दौरान एक चीतल घायल हो गया था और बाद में उसकी मौत भी हो गई थी की वजह से वन अधिनियम की धारा 26 के अलावा वन्य जीव संर​क्षण अधिनियम की धारा 9 बटटे 51 के तहत केस दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल किया गया। इस मामले में कंपनी के मालिक अशोक साहनी ने जिला अदालत और फिर हाईकोर्ट नैनीताल में राहत की अपील की लेकिन दोनों जगहों से उनकी अपील को खारिज कर दिया गया हालांकि इसी से संबंधित एक अन्य आदेश को लेकर वे हाईकोर्ट नैनीताल अदालत में अपील किए हुए हैं। इसलिए न्यायायिक दंडाधिकारी नरेन्द्र नगर जिला टिहरी गढवाल शंभूनाथ सेठवाल ने पायलट केके सिंह पर एक हजार रुपये जुर्माना और वन अधिनियम के तहत दोष सिद्ध माना है ​जबकि वाइल्ड लाइफ एक्ट में उन्हें बरी कर दिया गया है जबकि कंपनी के जनरल मैनेजर जिन्होंने दो लाख रुपये जुर्माना क्षतिपूर्ति के रुप में देने की बात कही थी ने महज चार हजार रुपये दिए थे, इस गंभीर मानते हुए अदालत ने जनरल मैनेजर कपिल मिश्रा से 1 लाख 96 हजार रुपये जुर्माने की वसूली के आदेश दिए हैं।

Dainik Samachaar

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