पढ़िए जंगल खत्म होते किस तरह ‘शिकार’ को असहाय हो जाता है एक ‘बाघ’

कार्बेट के पाखरो में क्या वनों के कटान ने छीन लिया बाघ का भोजन, टाइगरेस की दम तोड़ने की क्या यहीं है वजह
माना जा रहा वनों के कटान से पलायन हो गए हैं वन्य जीव, भूख से मरी बुढ़ी और कमजोर हो चुकी बाघिन

BY NAVEEN PANDEY

    सभी चित्र फाइल फोटो।

दैनिक समाचार, देहरादून: कार्बेट टाइगर लैंडस्कैप के कालागढ़ अंतर्गत पाखरो रेंज में बेसुध अवस्था में मिली बाघिन की मौत हो गई है। मौत की वजह उसके बूढ़े होने और शिकार करने में अक्षम को लेकर माना जा रहा है लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि जिस पाखरो रेंज में बाघिन की मौत हुई है, वहां पर वनों के कटान की वजह से जंगल लगभग खत्म हो चुका है। जिसकी वजह से वन्य जीवों ने पलायन कर लिया है लेकिन बाघिन कमजोर होने की वजह से ऐसा कर नहीं सकी और दम तोड़ दी। ऐसे में यहां सिर्फ बाघिन की मौत की बात नहीं है बल्कि जहां भी जंगल खत्म हो रहे हैं वहां पर इस तरह की स्थिति बन सकती है। वनों का इकॉलाजी सिस्टम बदल सकता है। लिहाजा इसे केवल बाघिन की मौत बुढ़ा और कमजोर मानकर कह देने मात्र से बात नहीं बनने वाली, बल्कि संजीदा वनाधिकारी इस बात पर जरूर गौर करें कि क्या वाकई बाघिन की मौत के कारणों के पीछे जंगल का खत्म होना और वन्य जीवों का पलायन कर जाना कहीं मुख्य वजह तो नहीं। यदि ऐसा है तो फिर भविष्य के लिए इस बात पर गौर करने की जरूरत है कि वनों में कमजोर, बीमार, बुजुर्ग, घायल वन्य जीव भी रहते हैं, जो जंगल विहीन होने पर दम तोड़ सकते हैं।
कालागढ़ डिवीजन के पाखरो रेंज में शुक्रवार की शाम को बाघिन बेसुध हालत में मिली थी। जिसे वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर वेटनरी डाक्टर से उपचार कराया लेकिन उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में बाघिन की मौत भूख के कारण हुई। वनाधिकारियों का कहना है कि बाघिन बेहद बुढ़ी हो चुकी थी। शिकार नहीं कर पा रही थी। लिहाजा उसकी मौत हुई। हालांकि गौर करने वाली बात यह भी है कि पाखरो में निर्माण को लेकर पेड़ों के हुए कटान की वजह से चीतल सहित अन्य वन्य जीव जो बाघों को ‘प्रे’ होते हैं वह जंगल छोड़कर कहीं और चले गए हैं। जिससे शिकार नहीं कर पाने और बूढ़ी होने की वजह से संभवत: बाघिन भूखी रह गई और उसकी मौत हो गई। जाहिर है जहां जंगल नहीं होगा वहां पर वन्य जीवों का बसेरा नहीं रहता है और वे ऐसी स्थिति में पलायन कर जाते हैं। चूंकि बाघिन बेहद कमजोर थी। लिहाजा वह शिकार की तलाश में भटकती रही। पोस्टमार्टम में भी उसका पेट पूरी तरह से खाली मिला है। हालांकि वनाधिकारी पाखरो में वनों के कटान और उससे दूसरे वन्य जीवों के पलायन को स्वीकार नहीं कर रहें। लेकिन बाघिन के बुढ़े होने और शिकार करने में अक्षम होने की वजह को मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों की क्या है राय
वन्य जीव विशेषज्ञों की मानें तो जिन जगहों पर बिग कैट फैमली के लिए ‘प्रे’ यानि उनके खाने वाले वन्य जीव की कमी हो जाए तो उनका जीवन संकट में पड़ सकता है। सक्षम बाघ और तेंदुआ हालांकि दूसरे जंगलों की ओर रुख कर लेते हैं लेकिन शिकार में अक्षम हो चुके वन्य जीवों के लिए यह घड़ी बेहद मुश्किल भरी होती है क्योंकि बाघ और तेंदुआ जैसे शिकारी वन्य जीवों को आसानी से भोजन नहीं मिलता। इन्हें अमूमन घात लगाकर और बड़ी दौड़ लगाकर ही शिकार मिलता है। ऐसे में कई बार उन्हें अफसलता भी हाथ लगती है। फिर ऐसी स्थिति में जब कोई बाघ या तेंदुआ बुढ़ा या कमजोर हो जाए तो वह शिकार करने में लगभग असमर्थ हो जाता है और फिर भूख की वजह से उसकी मौत हो सकती है, ऐसे में जंगल होंगे तभी वन्य जीव रहेंगे।

Dainik Samachaar

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