सावन-अधिकमास का बना अदभुत संयोग, विवाह-नौकरी की इच्छा रखने वाले करें ये उपाय

वर्षों बाद बन रहा है शुभ संयोग भक्तों की होगी बल्ले बल्ले
बीस साल बाद एक की बजाय दो सावन का बना संयोग
एक नहीं पूरे 59 दिन बनी रहेगी भोले बाबा की असीम कृपा

BY NAVEEN PANDEY 

दैनिक समाचार, देहरादून: सावन का महीना हर बार ही बेहद खास होता है लेकिन इस बार एक बहुत ही खास व सुखद संयोग लेकर सावन का महीना आ रहा है। एक नहीं पूरे 2 महीने यानि 59 दिन का सावन होगा। जिसमें भोले नाथ की असीम कृपा बरसने जा रही है। 29 जून से चतुर्मास भी शुरू हो चुका है और अबकी अदभुत 20 साल बाद ये संयोग बना है कि एक की बजाय दो सावन होगा। पंचांग के अनुसार सावन अधिक मास के फलस्वरुप जहां देश में सुख-शांति बढ़ेगी। लेकिन किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन का योग भी बना हुआ है। इस बार सावन में अधिक मास होने के कारण भक्तों को शिव शंकर की आराधना के लिए 59 दिन मिलने वाले हैं।

आईए जानते हैं कि आखिर अबकी चतुर्मास और सावन का मेल आपके जीवन पर क्या असर डालने जा रहा है। अधिक मास के जो देवता हैं वह भगवान विष्णु ही हैं और इस बार सावन अधिकमास का प्रारंभ 18 जुलाई से होकर 16 अगस्त को अधिकमास समाप्त होगा जहां सावन का महीना भगवान शिव के अधीन है वहीं अधिकमास के जो देवता है वह भगवान विष्णु हैं इसी कारण अधिक मास के 30 दिन भक्तों के लिए विशेष कल्याणकारी रहने वाला है। जहां भगवान शिव की कृपा तो मिलेगी हीं वहीं, भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए ऐसे संयोग बहुत कम देखने को मिलता है। अधिक मास के दौरान विष्णु के चिर निद्रा में होते हैं लेकिन अबकी इस संयोग के अलावा भी और भी कई शुभ संयोग इस बार बन रहे हैं। जैसे सावन में आठ सोमवार, दो अमावस्या, दो पूर्णिमा और चार एकादशी विचार प्रदोष व्रत का शुभ संयोग भी मिलेगा।

शास्त्रीय मान्यता के अनुसार सावन में भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती हैं और मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु चिर निंद्रा में चले जाते हैं। इस बार भी भगवान विष्णु देव शयन एकादशी के साथ चिर निंद्रा में चले गए हैं। जिसको आम भाषा में देव शयन भी कहा जाता है लेकिन इस बार सावन में बन रहे इन अदभुत संयोग का फल पाने के लिए भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा भी विशेष कल्याणकारी रहेगी क्योंकि इस बार आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी जो 23 नवंबर 2023 को होगी तब तक चतुर्मास रहेगा। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु इस समय चिर निंद्रा में चले जाते हैं और पृथ्वी का सारा भार भगवान शिव के ऊपर रहता है भगवान विष्णु के चिर निंद्रा में होने के कारण इस समय कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य नहीं किया जाता लेकिन इस बार चतुर्मास में सावन चतुर्मास के इस समय में कई प्रमुख व्रत व त्योहार भी रहेंगे इसमें सावन का सोमवार, शिवरात्रि, नाग पंचमी, रक्षाबंधन, गणेश उत्सव, पितृपक्ष, नवरात्रि, हरियाली तीज, करवा चौथ अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली और गोवर्धन जैसे प्रमुख त्योहार शामिल है। जाहिर है इन त्योहारों पर देवताओं की कृपा तो बरसेगी। हालांकि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि से बचना चाहिए। 

विवाह में अड़चन और नौकरी वाले ये करें उपाय, बन जाएगा काम
ज्योतिष, वास्तु और रत्न सलाहकार राहुल अग्रवाल बताते हैं कि इस बार अधिकमास में अपने विशेष कार्यों के लिए जैसे विवाह का ना होना। आर्थिक अड़चन तथा कैरियर से संबंधित समस्याओं के लिए उपाय करना बेहद सुखद होगा। विवाह में आ रही अड़चने दूर करने के लिए भगवान शिव को पंचामृत चढ़ाकर जल से स्नान कराएं। आर्थिक रूप से सफलता पाने के लिए सफेद चंदन भगवान शिव को अर्पित करें या लगाएं। कैरियर में आ रही बाधाओं के निवारण के लिए भगवान शिव को धतूरे का फल अर्पित करें। वैवाहिक जीवन में यदि बाधाऐं आए तो सफेद फूल माता पार्वती व भगवान शिव को अर्पित करें। सर्व कार्य सिद्धि के लिए ओम नमः शिवाय व ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें।

किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन या बड़ी हलचल होगी
ज्योतिषाचार्य राहुल ने बताया कि चतुर्मास में दो सावन का होने का योग लगभग 20 साल बाद बन रहा है पंचांग के अनुसार सावन अधिक मास के फल स्वरुप जहां देश में सुख-शांति बढ़ेगी। वहीं किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन का योग भी बन सकता है।

29 जून से शुरू हो चुका है चतुर्मास, क्या करें
ज्योतिषाचार्य राहुल का कहना है कि चतुर्मास का आरम्भ 29 जून दिन बृहस्पतिवार से शुरू हो चुका है। सामान्यत: चतुर्मास 4 महीने का होता है लेकिन इस बार मलमास यानि पुरुषोत्तम मास होने के कारण इस बार चतुर्मास 5 महीने रहेगा। इस समय अधिक से अधिक ईश्वर की आराधना किसी भी रूप में करनी चाहिए। श्रीमद्भागवत व गीता का पाठ करें। सात्विक रहें।
जप दान तप अनुष्ठान आदि करें।

क्या ना करें
विवाह, मुंडन नहीं कराएं।
किसी भी मंदिर आदि का निर्माण कार्य आरंभ ना करें।
देव प्रतिष्ठा तथा गोदान आदि भी नहीं करनी चाहिए।
दही, शहद, मूली, बैंगन और पत्ते वाली सब्जियां भी मनाही है।

Dainik Samachaar

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