रूस और यूक्रेन के युद्ध के बाद भारत में मेडिकल की पढ़ाई को लेकर उठने लगे सवाल, प्रधानमंत्री ने की ये घोषणा

-मेडिकल की पढ़ाई के लिये महंगी फीस के चलते टेंशन में हैं तो यह खबर आपके लिए है

-भारत में प्राइवेट कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई काफी मुश्किल है

-अगले सत्र से लागू होगी गाइडलाइन

-यह फैसला निजी विश्वविद्यालयों के अलावा डीम्ड यूनिवर्सिटीज़ पर भी लागू होगा

दैनिक समाचार, दिल्ली

अगर आप भी मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं और कॉलेज की महंगी फीस के चलते टेंशन में हैं तो यह खबर आपके लिए है। अब आपको एमबीबीएस या मेडिकल के अन्य कोर्सेस की पढ़ाई के लिए प्राइवेट कॉलेजों में अपनी जेब खाली करने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। दरअसल, अब आप किसी भी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में सरकारी कॉलेज की फीस में ही एमबीबीएस की डिग्री ले सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की। गौरतलब हो कि भारत में प्राइवेट कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई काफी मुश्किल है। ऐसे में छात्र या तो सरकारी कॉलेजों से डिग्री लेना पसंद करते हैं, या फिर पढ़ाई के लिए विदेशों की ओर रूख करते हैं। वहीं रूस और यूक्रेन के युद्ध के बाद बने हालातों से भारत में मेडिकल की पढ़ाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में भी सरकारी के बराबर ही फीस लिए जाने का ऐलान पीएम मोदी ने किया है। बता दें कि औषधि दिवस के अवसर पर जन औषधि योजना की शुरुआत करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा करते हुए कहा कि ‘हमने तय किया है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में आधी सीटों पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर ही फीस लगेगी। अगले सत्र से लागू होगी गाइडलाइन। केंद्र सरकार द्वारा मेडिकल की फीस को लिए गए इस फैसले के बाद नेशनल मेडिकल कमीशन ने गाइडलाइन तैयार कर ली है। बताया जा रहा है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 50 फीसदी सीटों पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों जितनी फीस को लेकर एनएमसी की नई गाइडलाइन अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। यह फैसला निजी विश्वविद्यालयों के अलावा डीम्ड यूनिवर्सिटीज़ पर भी लागू होगा।

Dainik Samachaar

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