हिन्दू धर्म के लिए गुरुतेग बहादुर महाराज ने अपना बलिदान दिया : संजय कुमार

-आरएसएस ने मनाया गुरुतेग बहादुर जी महाराज का 400वां प्रकाशोत्सव

-गुरुतेग बहादुर महाराज का जीवन ओलोकिक जीवन रहा है

दैनिक समाचार, हरिद्वार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हरिद्वार नगर द्वारा श्रीगुरुतेग बहादुर महाराज का 400वां प्रकाश उत्सव ऋषिकुल ऑडोटोरियम में भाव पूर्व रूप से संगोष्ठी कर मनाया गया। इस अवसर पर गुरु महाराज के जीवन, बलिदान व वाणी को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निर्मल अखाड़े के कोठारी महंत जसविंदर सिंह ने कहा कि गुरुतेग बहादुर महाराज का जीवन ओलोकिक जीवन रहा है। गुरु महाराज के व्यक्तित्व महान था, उनके जीवन के समाज को प्रेरणा मिली। सनातन धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। कोठारी महंत ने कहा कि गुरुमहाराज ने जो संसार मे आकर किया उसका कोई सानी नही है। उसका कर्ज हम कभी भी उतर सकते। उन्होंने कहा कि यदि गुरुमहाराज इस धरती पर न आते हो भारत का नक्शा आज कुछ हो ही होता। उन्होंने हिन्दु धर्म व राष्ट्र की रक्षा के लिए समाज के समक्ष एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया। भक्ति, ज्ञान,सेवा सभी की प्रतिमूर्ति गुरुमहाराज में विराजमान है। गुरुमहाराज के बलिदान के कारण ही आज हिन्दु धर्म सुरक्षित है। औरंजजेब के शासन में जब सभी को इस्लाम मे लाने का एलान हुआ तब गुरु महाराज ने बड़ी निडरता से इस्लाम नही कबूलाने का साहस किया। इस्लाम धर्म काबुल न करने पर बड़ी बेहरमी से गुरु महाराज का सिर काट दिया गया। 

मुख्य वक्ता आरएसएस के सह प्रान्त प्रमुख संजय कुमार ने कहा हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए सिख धर्म की स्थापना हुई। सिख धर्म सनातन का ही एक महत्वपूर्ण अंग है। हिन्दू धर्म के लिए गुरुतेग बहादुर महाराज ने अपना बलिदान दिया। हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए गुरु महाराज ने औरंजजेब के समक्ष एक प्रस्ताव रखवाया की गुरुतेग बहादुर महाराज के इस्लाम काबुल करने के साथ ही सभी लोग इस्लाम काबुल कर लेंगे। गुरु महाराज के इस प्रस्ताव को औरंजेब ने स्वीकार करते हुए दिल्ली बुलाया। गुरु महाराज ने दिल्ली में औरंजजेब के सभी प्रलोभनों को जवाब देते हुए इस्लाम नही कबूला जिस से नाराज औरंजजेब ने गुरु महाराज के तीन शिष्यों को अलग अलग तरीके से मौत के घाट उतार दिया। जिससे बाद भी गुरु महाराज ने इस्लाम नही कबूला तो एलान कर गुरुमहाराज का सिर कटवा दिया। गुरुमहाराज का जिस स्थान पर सिर काटा वह स्थान आज भी पूजनीय है। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुनील जोशी ने भी गुरुमहाराज को नमन करते हुए हिन्दू धर्म के लिए उनके बलिदान से समाज को प्रेरणा लेने की बात कही। मंचासीन मनुभवों में आरएसएस के जिला सञ्चालक रोहिताश कुँवर व नगर सञ्चालक डॉ. यतीन्द्र नाग्यान मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन नगर कार्यवाह गुरमीत सिंह ने किया। कार्यक्रम में महामंडलेश्वर ललितानंद महाराज, राम मुनि महाराज, स्वामी लोकेश दास महाराज, स्वामी शिवानंद, आचार्य पुष्पेंद्र पूरी, महंत रविदेव शास्त्री, महंत दिनेश दास, आचार्य रामचंद्र शर्मा, सरदार मनमोहन सिंह, हरभजन सिंह, सतपाल सिंह, महेन्द्र सिंह चावला, अमर पाल सिंह, दलजीत सिंह, परविंदर गिल, सुखदेव सिंह, सेठी जी, विभाग प्रचारक चिरंजीवी, जिला प्रचारक अमित कुमार, सीए अनिल वर्मा, प्रो.प्रेम चन्द्र शास्त्री, डॉ. विनोद आर्या, रमेश उपाध्याय, विधायक आदेश चौहान, डॉ. माधवी गोस्वामी, अमित शर्मा सहित बड़ी संख्या में सिख संगत के साथ श्रोतागण मौजूद रहे।

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