‘हरदा’: ना जीते, ना जिता सके, अब ‘राजनीतिक हैसियत’ पर सवाल

‘हरदा’ की सियासत में सबकुछ उलट पलट
पांच साल में चार बार चुनाव हारे चुके ‘हरदा’
अंतिम चुनाव की दुहाई भी नहीं आई काम

नवीन पाण्डेय, देहरादून: उत्तराखंड में न केवल कांग्रेस को सरकार बनाने की उम्मीद थी बल्कि हरीश रावत को मुख्यमंत्री का अंदरुनी तौर पर चेहरा माना गया था पर सियासत ने सबकुछ उलट पलटकर रख दिया है। कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और सरकार बनने से पहले ही सीएम पद के प्रमुख दावेदार रहे पूर्व सीएम हरीश रावत के लिए अपने राजनीतिक भविष्य अब बेहद संकट में नजर आ रहा है। कांग्रेस के भीतर रावत की राजनीतिक हैसियल पर भी सवाल उठ सकता है। दरअसल, हरीश रावत पांच सालों में चार बार चुनाव हार गए हैं।
सियासत के जानकार बताते हैं कि हरीश रावत खुद भी ये मान रहे थे​ कि वे उनका अंतिम चुनाव होगा और जनता जनार्दन का उन्हें आशीर्वाद मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि हरीश रावत को लालकुंआ सीट से करारी हार का सामना करना पड़ा। सियासी पंड़ित अभी से अब ये सवाल करने लगे हैं कि पांच साल में रावत की चौथी बड़ी हार और कांग्रेस में क्या रावत युग का हाशिये पर जाना मान लिया जाए। यह पहला मौका नहीं जब रावत को हार का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सीएम रहते हुए भी रावत हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा सीट से चुनाव एक साथ चुनाव हारे थे। उसके बाद वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में नैनीताल सीट से रावत को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि रावत हर हार के बाद नई ताकत के दोबारा उठ खड़े हुए लेकिन चूंकि उम्र के पड़ाव पर वर्ष 2022 का चुनाव रावत के राजनीतिक करियर का अहम पड़ाव माना जा रहा था क्योंकि वे खुद ही इस बात को दोहरा चुके हैं कि वो या तो सीएम बनेंगे या फिर घर ही बैठेंगे।

सोशल मीडिया पर औपचारिक घोषणा से पहले ही हरदा ने स्वीकार कर ली थी हार
पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी हार को औचारिक घोषणा होने से पहले ही स्वीकार कर लिया था। एक पोस्ट डालकर उन्होंने कहा कि लालकुआं विधानसभा क्षेत्र से मेरी चुनावी पराजय की औपचारिक घोषणा ही बाकी है। मैं लालकुआं क्षेत्र के लोगों से जिनमें बिंदुखत्ता, बरेली रोड के सभी क्षेत्र सम्मिलित हैं, क्षमा चाहता हूं।
मैं उनका विश्वास हासिल न कर पाया। जो चुनावी वादे उनसे मैंने किये, उनको पूरा करने का मैंने अवसर गवा दिया है। बहुत अल्प समय में आपने मेरी तरफ स्नेह का हाथ बढ़ाने का प्रयास किया। रावत ने चुनाव में सहयोग करने वाले पार्टी नेताओं का आभार भी जताया। कहा कि उन्होंने अथवा परिश्रम कर मेरी कमजोरियों को ढकने और जनता के विश्वास को मेरे साथ जोड़ने का अथक प्रयास किया। रावत ने कहा कि जैसे ही लोगों का ध्यान अपने दैनिक कार्यों पर आ जाए तो लालकुआं क्षेत्र के लोगों को धन्यवाद देने के लिए उनके बीच जाऊंगा। उन्होंने मुझसे श्रेष्ठ उम्मीदवार को अपना प्रतिनिधि चुना है उनको और उनके द्वारा चयनित उम्मीदवार को मेरी ओर से बहुत-बहुत बधाई।

कांग्रेस की बागी ने लगाई हरीश रावत के वोट में सेंध
कुमाऊं की लालकुआं सीट से चुनाव लड़े पूर्व सीएम हरीश रावत हार गए हैं। करीब 14 हजार वोटों से उनकी हार हुई है। माना जा रहा है कि लालकुआं सीट से कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ीं संध्या डालाकोटी के कारण कांग्रेस के वोट बैंक में खासी सेंध लगी, जिससे हरीश रावत को हार का मुंह देखना पड़ा। हरीश रावत की यह दूसरी बड़ी हार है। पिछले चुनाव में भी हरीश रावत को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा था। हरीश रावत की इस हार के बाद भाजपाइयों ने कहा कि ये ‘हर दा’ नहीं ’हार दा’ हैं।

‘हरदा’ की हार की ये रही मुख्य वजहें
टिकट वितरण की प्रक्रिया दौरान अंतिम क्षणों में लिया चुनाव लड़ने का फैसला
रामनगर से टिकट तय होने के बाद लालकुआं सीट पर शिफ्ट होना पड़ा भारी
बिलकुल नई विस सीट होने की वजह से नहीं भांप सके जनता की नब्ज को
सीएम का चेहरा व राष्ट्रीय लीडर होने के भ्रम की वजह से रहे मुगालते में
पूर्व मंत्री यशपाल आर्य, हरीशचंद्र दुर्गापाल, हरेंद्र वोरा पर भरोसा भी न आया काम

Dainik Samachaar

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