होली के बाद होती है शीतलाष्टमी पूजन होता है जरुरी, इसलिये महिलाओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना की

-सुबह 5 बजे से ही माता के मंदिरों में माता की पूजा करने के लिए महिलाओं की भीड़ लगना शुरू हो गई

-लोगों ने मक्का की राबडी, कांझा, पुवे, पकौड़ा, पूरी सहित अनेक पकवान का भोग लगाया

दैनिक समाचार, हरिद्वार
शीतलाष्टमी पर जिले में स्थित विभिन्न शीतला माता मंदिरों में महिलाओं ने शीतला माता की विधि विधान से पूजा अर्चना की और ठंडे पकवानों का भोग लगाया। सुबह 5 बजे से ही माता के मंदिरों में शीतला माता की पूजा करने के लिए महिलाओं की भीड़ लगना शुरू हो गई थी। महिलाएं समूह के रूप में गीत गाते हुए पूजा करने के लिए मंदिर पहुंचीं। शीतला माता का महिलाओं ने जल से अभिषेक किया और रोली-मोली अन्य पूजा सामग्री से विधि विधान से पूजा की। इसके बाद ठण्डे पकवानों का भोग लगाया। लोगों ने मक्का की राबडी, कांझा, पुवे, पकौड़ा, पूरी सहित अनेक पकवान का भोग लगाया। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र में भी शीतलाष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। जहां शीतला माता मंदिरों में महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर ठंडे पकवानों का भोग लगाया। मंदिरों में महिलाओं की भीड़ रही, महिलाओं ने एक दिन पहले बनाए पकवानों को सुबह जल्दी ही मंदिरों में पुए, खीर आदि आदि का भोग लगाकर खुशहाली की कामना को लेकर पूजा अर्चना की।

होली के बाद सातवें और आठवें दिन देवी शीतला माता की पूजा की परंपरा है 
होली के बाद सातवें और आठवें दिन देवी शीतला माता की पूजा की परंपरा है। इन्हें शीतला सप्तमी या शीतलाष्टमी कहा जाता है। शीतला माता का जिक्र स्कंद पुराण में मिलता है। पौराणिक मान्यता है कि इनकी पूजा और व्रत करने से चेचक के साथ ही अन्य तरह की बीमारियां और संक्रमण नहीं होता है।

शीतला माता का ही व्रत ऐसा है जिसमें शीतल यानी ठंडा भोजन करते हैं
शीतला माता का ही व्रत ऐसा है जिसमें शीतल यानी ठंडा भोजन करते हैं। इस व्रत पर एक दिन पहले बनाया हुआ भोजन करने की परंपरा है। इसलिए इस व्रत को बास्योडा भी कहते हैं। माना जाता है कि ऋतुओं के बदलने पर खान-पान में बदलाव करना चाहिए है। इसलिए ठंडा खाना खाने की परंपरा बनाई गई है। धर्म ग्रंथों के मुताबिक शीतला माता की पूजा और इस व्रत में ठंडा खाने से संक्रमण और अन्य बीमारियां नहीं होती।

पूजा के बाद महिलाएं अपने परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करती हैं
हिन्दू धर्म के अनुसार सप्तमी और अष्टमी तिथि पर महिलाएं अपने परिवार और बच्चों की सलामती के लिए और घर में सुख, शांति के लिए बास्योड़ा बनाकर माता शीतला को पूजती हैं। माता शीतला को बास्योड़ा में कढ़ी-चावल, चने की दाल, हलवा, बिना नमक की पूड़ी चढ़ावे के एक दिन पहले ही रात में बना लेते हैं। अगले दिन ये बासी प्रसाद देवी को चढ़ाया जाता है। पूजा के बाद महिलाएं अपने परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करती हैं।

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