ये क्या हुआ भगवान् शंकर को भी होना पड़ा कोर्ट में पेश, दोबारा फिर होना पड़ेगा पेश मिली अगली तारीख

-अधिकारियों ने भगवान शंकर को आरोपी बनाकर कोर्ट में पेश होने का नोटिस जारी कर दिया
-कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाने की बात कही
-यह कारनामा रायगढ़ के राजस्व अधिकारियों के कारण हुआ
-स्थानीय लोग शिवलिंग ही उखाड़कर कोर्ट में आ गए, कोर्ट में भगवान को भी अगली तारीख दे दी गई

दैनिक समाचार, रायगढ़

छत्तीसगढ़ के रायगढ का मामला सामने आया है जहाँ भगवान् भोले शंकर की कोर्ट में हुई है पेशी। जी हाँ यह सच है। अगली तारीख भी मिल गयी है।  भगवन बोले शंकर को। दरअसल, तहसील कोर्ट ने 23 से 24 फरवरी और 2 मार्च को सीमांकन दल गठित कर सम्बंधित कौहाकुंडा गांव में जांच कराई थी। इसी सिलसिले मेंं कई लोगों को नोटिस जारी किया गया था। मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ का है। एक कोर्ट में बीते शुक्रवार को अजब मामला सामने आया जब यहां भगवान की पेशी हो गयी। यह कारनामा रायगढ़ के राजस्व अधिकारियों के कारण हुआ। पहले तो अधिकारियों ने भगवान शंकर को आरोपी बनाकर कोर्ट में पेश होने का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाने की बात कही। स्थानीय लोग शिवलिंग ही उखाड़कर कोर्ट में आ गए, लेकिन कोर्ट में भगवान को भी अगली तारीख दे दी गई। कारण रहा तहसीलदार का नहीं मिलना उसके बाद कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी। दरअसल, रायगढ़ में अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। रायगढ़ तहसील कोर्ट ने 23 से 24 फरवरी और 2 मार्च को सीमांकन दल गठित कर कौहाकुंडा गांव में जांच कराई थी। कई लोगों ने अवैध कब्जे किये हुए थे। इसके बाद कोर्ट की ओर से 10 लोगों को नोटिस जारी किया गया। तय तारीख पर कोर्ट में हाजिर न होने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें बेदखल करने की चेतावनी दी गई थी। साथ ही निर्माण पर भी रोक लगा दी गई थी। इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई की तारीख तय की गई थी। कोर्ट की ओर से जिन 10 लोगों को नोटिस दिया गया, उसमें कोहाकुंडा के वार्ड 25 में बना शिव मंदिर भी शामिल था। किसी पुजारी का नाम नहीं होने के कारण सीधे “शिव मंदिर” को ही नोटिस जारी कर दिया गया। चूंकि नोटिस में प्रतिवादी के हाजिर नहीं होने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाने की बात कही गई थी, इसलिए स्थानीय लोगों ने शिवलिंग को ही मंदिर से उखाड़ लिया और ट्रॉली पर रख कर भगवान् जी को लेकर कोर्ट पहुंच गए। लेकिन कोर्ट पहुंचे तो बाहर नोटिस लगा हुआ था कि पीठासीन अधिकारी किसी अन्य राजस्व कार्य में व्यस्त हैं, इसके चलते मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख निर्धारित कर दी गई। अब भगवान जी को मिल गयी अगली तारीख।

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