मोतीचूर जंगल का मामला : उम्मीद थी कि माँ इसे ले जाएगी, लेकिन कंही नजर नही आई माँ की आहट

-मोतीचूर में इसका परीक्षण कर सम्भवता इसे हरिद्वार स्तिथ रेस्क्यू सेंटर भेज दिया जाएगा

दैनिक समाचार, हरिद्वार 
वन क्षेत्रो में अक्सर ही वन्यजीवों के शावकों के बिछड़ने की खबरे आती रहती है। कई बार मादा वन्यजीव किन्ही कारणों से अपने बच्चो का त्याग कर देती है तो वन्ही कई बार किसी आपात स्थिति में भी ये शावक अपनी माँ व झुंड से बिछड़ जाते है। ऐसा ही एक मामला सोमवार की शाम राजाजी टाइगर रिजर्व में देखने को मिला। पार्क की मोतीचूर रेंज में गुलदार का एक शावक गंगा मझियाडे में मिला। बसन्ती माता मंदिर से सटे गंगा तटीय इस क्षेत्र में गश्त के दौरान वन कर्मियों ने इसे अकेला पाया। वन कर्मियों ने इसकी सूचना तत्काल मोतीचूर स्थित कंट्रोल रूम को दी। मौके पर पँहुचे अधिकारियों ने इसकी लगातार मोनिटरिंग की। उन्हें उम्मीद थी कि कुछ समय बाद इसकी माँ इसे ले जाएगी। इसको लेकर रेंज स्तर पर कई लोगों की टीम को रात भर मोनिटरिंग के निर्देश जारी किए गए। वन कर्मियों द्वारा रात भर इसकी निगरानी की गई, मगर उसके बावजूद भी सुबह तक इसकी माँ की आहट कंही आस पास तक नजर नही आई। वनकर्मियों द्वारा इस स्थान पर मादा गुलदार की तलाश भी की गई मगर नतीजा शून्य  ही रहा। ऐसी परिस्थितियों में पार्क टीम द्वारा इस नन्हे शावक को रेस्क्यु कर मोतीचूर लाया गया है। मोतीचूर में इसका परीक्षण कर सम्भवता इसे हरिद्वार स्तिथ रेस्क्यू सेंटर भेज दिया जाएगा। 

राजाजी टाइगर रिजर्व मोतीचूर रेंज वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र गिरी ने बताया की वन क्षेत्रो में अक्सर इस तरह की घटनाएं होती है, सोमवार देर शाम गस्त के दौरान डेढ़ माह का यह शावक मिला था, रात भर इसकी निगरानी की गई मगर इसकी माँ की कंही कोई आहट नही मिलने पर इसे रेस्क्यु किया गया, उच्चाधिकारियों के निर्देशो के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। 

Dainik Samachaar

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