आप भी करें ये काम : ये अमावस्या पितृदोष से मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण : पंडित मनोज कुमार त्रिपाठी

-हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या कहते हैं
-इस साल अमावस्या गुरुवार आज (31 मार्च) और शुक्रवार कल (1 अप्रैल) को दो दिन है
-ये संवत् 2078 की अंतिम तिथि है इसके बाद शनिवार 2 अप्रैल से नया संवत् 2079 शुरू हो रहा है -शनिवार से ही चैत्र नवरात्रि भी शुरू होगी
-नवसंवत् से पहले इस अमावस्या पर पितर के लिए तर्पण जरूर करें

वासुदेव राजपूत, दैनिक समाचार, हरिद्वार हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। चैत्र अमावस्या को पितृदोष से मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन माँ गंगा में स्नान करने दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन पितरों का तर्पण करने की भी परपंरा है। इस साल अमावस्या गुरुवार आज (31 मार्च) और शुक्रवार कल (1 अप्रैल) को दो दिन है। ये संवत् 2078 की अंतिम तिथि है। इसके बाद शनिवार 2 अप्रैल से नया संवत् 2079 शुरू हो रहा है। शनिवार से ही चैत्र नवरात्रि भी शुरू होगी। नवसंवत् से पहले इस अमावस्या पर पितर के लिए तर्पण जरूर करें। हरिद्वार स्थित प्राचीन मंदिर श्रीनारायणी शिला के पुरोहित पंडित मनोज कुमार त्रिपाठी शास्त्री ने बताया की चैत्र मास की अमावस्या दो दिन होने से दोनों ही दिनों में जाप और दान-पुण्य किया जा सकता है। अमावस्या पर खासतौर पर किसी तीर्थ में स्नान करना चाहिए और पौराणिक महत्व वाले मंदिरों में दर्शन-पूजन करना चाहिए। अमावस्या पर पीपल की भी पूजा की जाती है। इस बार गुरुवार और शुक्रवार को अमावस्या होने से इस तिथि पर विष्णु जी, महालक्ष्मी, गुरु ग्रह और शुक्र ग्रह के लिए विशेष पूजा-पाठ किए जा सकते हैं।

पुरोहित पंडित मनोज कुमार त्रिपाठी शास्त्री ने बताया की अमावस्या के स्वामी पितृदेव हैं। इसलिए इस तिथि पर पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध कर्म और धूप-ध्यान करना चाहिए। तीर्थ स्नान के बाद दान-पुण्य करें। इस दिन इष्टदेव के मंत्रों का जाप करें। अमावस्या पर स्नान के बाद सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। इस दिन किसी शिव मंदिर में तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इस दिन हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। गुरु ग्रह के लिए चने की दाल, हल्दी का दान करें। शुक्र ग्रह के दूध का दान करना चाहिए। इन दोनों ग्रहों की पूजा शिवलिंग रूप में ही की जाती है। इस लिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।

ऐसे करें पितरों का तर्पण
अमावस्या के दिन सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर श्रीनारायणी शिला मंदिर पर पितरों का पूजन करें। अपने परिजनों का पिंडदान या तर्पण जैसा अनुष्ठान किया जाता तब इसमें परिवार के बड़े सदस्यों को करना चाहिए। पितरों को तर्पण के दौरान जौ के आटे, तिल और चावल से बने पिंड अर्पण करना चाहिए। अमावस्या के दिन बने भोजन को सबसे पहले कौवे, गाय और कुत्तों को अर्पित करना चाहिए। इस दिन ब्राह्राणों को भोजन और दान-दक्षिणा करनी चाहिए और पितृपक्ष से संबंधित मंत्रों का जाप करना चाहिए। अमावस्या के दिन शाम के समय घर के ईशान कोण में पूजा वाले स्थान पर गाय के घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से आपको सभी सुखों की प्राप्ति होगी। अमावस्या के दिन आटे की गोलियां बनाकर किसी तालाब या नदी के किनारे जाकर ये आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। ऐसा करने से करने से आपकी सभी परेशानियों का अंत होगा। अमावस्या पर काली चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपको सभी पापों से मुक्ति मिलेगी।

गया की तरह ही हरिद्वार के श्रीनारायणी शिला में श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष मिलता है
हरिद्वार स्थित प्राचीन मंदिर श्रीनारायणी शिला मंदिर में गुरुवार को श्राद्ध करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां कई राज्यों से लोग तर्पण के लिए पहुंचे। मान्यता है कि गया की तरह ही श्रीनारायणी शिला में श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। श्रद्धालुओं ने पितरों को खुश करने के लिए कुशा, जौ, काला तिल, अक्षत, दूध व जल लेकर पूजा करवाई। गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीनारायणी शिला मंदिर पर पहुंचे। शिला में पूजा-पाठ के बाद श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी पर गंगा में डुबकी लगाई।

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