दूसरे दिन हुई मां ब्रह़्चारिणी की पूजा, जानिए कल कैसे करें तृतीय शक्ति मां चंद्रघंटा की आराधना

-नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौं स्वरुपों की पूजा करने का विधान है

वासुदेव राजपूत

दैनिक समाचार, हरिद्वार, नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौं स्वरुपों की पूजा करने का विधान है। इस समय चैत्र नवरात्रि आरंभ हो गए हैं। चैत नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को मां ब्रह़्चारिणी की पूजा-अर्चना हुई। मंदिरों व घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ के साथ कई जगहों पर रामायण पाठ भी हुआ। हरिद्वार के माँ मनसा देवी, माँ चंडी देवी, माँ माया देवी, दक्षिण काली मंदिर माँ शुरेश्वरी मंदिर आदि जगहों पर मां की कलश स्थापित कर पूजा हो रही है। हरिद्वार के माँ मनसा देवी मंदिर पर भी सुबह 4 बजे से ही माता की आरती और दर्शन के लिए भक्तों का तांता लग जाता है। मनसा देवी  श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किये हुए हैं।

पंडित सुरेश तिवारी

नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है : पंडित सुरेश तिवारी 
मनसा देवी मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुरेश तिवारी ने बताया की नवरात्रि के तीसरे दिन मां भगवती की तृतीय शक्ति मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन मां चंद्रघंटा के विग्रह की पूजा-आराधना की जाती है। देवी मां की ये शक्ति यानि मां चंद्रघंटा शत्रुहंता के रूप में विख्यात हैं। ऐसे में 4 अप्रैल 2022, सोमवार के दिन चैत्र नवरात्र तृतीया है। पंडित सुरेश तिवारी ने बताया कि देवी चन्द्रघंटा की पूजा और भक्ति करने से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। नवरात्रि के तीसरे दिन जो भी माता के तीसरे रूप मां चन्द्रघण्टा की पूजा अर्चना करता है, उन सभी को माता की कृपा प्राप्त होती है। 

पंडित गणेश शर्मा

देवी चंद्रघंटा अपने भक्तों को अलौकिक सुख देने वाली है : पंडित गणेश शर्मा
मनसा देवी मंदिर के पुजारी पंडित गणेश शर्मा ने बताया कीदेवी मां के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने के समान होने के साथ ही इनके दस हाथ हैं। इन हाथों में खड्ग, अस्त्र-शस्त्र और कमंडल विद्यमान हैं। मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। मां चंद्रघंटा के दस भुजाएं हैं और दसों हाथों में खड्ग, बाण सुशोभित हैं।

इन्हें शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। माता चन्द्रघंटा देवी का शरीर शरीर सोने की तरह चमकता हुआ प्रतीत होता है। ऐसी मान्यता है कि माता के घंटे की तेज व भयानक ध्वनि से दानव, और अत्याचारी राक्षस सभी बहुत डरते है। देवी चंद्रघंटा अपने भक्तों को अलौकिक सुख देने वाली है। माता चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। यह हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहने वाली मुद्रा में होती है। मां चंद्रघंटा के गले में सफेद फूलों की माला रहती है। मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और और इसी का दान भी करें। ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं। भोग के रूप में यदि मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाया जाए तो यह उत्तम रहेगा।

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