तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई में नए विधानसभा-सह-सचिवालय परिसर के निर्माण की योजना का ऐलान किया है। प्रस्तावित परियोजना पर करीब 1,200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार के मुताबिक, नए परिसर का निर्माण इसलिए जरूरी माना जा रहा है क्योंकि ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज में मौजूदा सचिवालय का विस्तार करना संभव नहीं है।
प्रस्तावित परिसर करीब 20 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसे आधुनिक, अत्याधुनिक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार करने की योजना है। सरकार का उद्देश्य सभी प्रमुख विभागों को एक ही परिसर में लाना है, जिससे प्रशासनिक कामकाज को अधिक व्यवस्थित किया जा सके।
फोर्ट सेंट जॉर्ज में विस्तार की सीमाएं
विधानसभा में योजना की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि 17वीं सदी में निर्मित फोर्ट सेंट जॉर्ज का ऐतिहासिक और विरासत महत्व है। ऐसे में वहां नए निर्माण के जरिए सचिवालय का विस्तार करना आसान नहीं है।
विजय के अनुसार, नए परिसर में विधानसभा और सचिवालय के कामकाज के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा पर्याप्त पार्किंग, कॉन्फ्रेंस सुविधाएं और अधिकारियों, कर्मचारियों, आगंतुकों तथा आम जनता की जरूरतों के अनुरूप अन्य बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नए परिसर के निर्माण का मतलब फोर्ट सेंट जॉर्ज को छोड़ना नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक इमारत को उसकी विरासत पहचान और मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए संरक्षित किया जाएगा।
कहां बन सकता है नया परिसर?
सरकार की ओर से अभी तक नए विधानसभा-सचिवालय परिसर की अंतिम जगह की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, सरकारी सूत्रों के हवाले से पट्टिनापक्कम, नंदंबक्कम, गिंडी और कोयंबेडु जैसे इलाकों के नाम संभावित स्थानों के तौर पर सामने आए हैं।
अंतिम स्थान का चयन भूमि की उपलब्धता, प्रशासनिक जरूरतों और अन्य तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किया जा सकता है।
फोर्ट सेंट जॉर्ज का ऐतिहासिक महत्व
फोर्ट सेंट जॉर्ज का निर्माण 17वीं सदी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कराया था। ब्रिटिश शासन के दौरान यह मद्रास प्रेसिडेंसी के प्रशासन का प्रमुख केंद्र रहा। स्वतंत्रता के बाद मद्रास राज्य और बाद में तमिलनाडु के गठन के बावजूद यह परिसर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा।
आज भी विधानसभा और सचिवालय से जुड़े कामकाज के लिए फोर्ट सेंट जॉर्ज का उपयोग किया जाता है। हालांकि, परिसर के विस्तार की संभावनाएं सीमित हैं। इसके कुछ हिस्से रक्षा अधिकारियों के नियंत्रण में हैं, जबकि ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण से जुड़े नियम भी नए निर्माण को सीमित करते हैं।
पहले भी हो चुके हैं राजधानी के प्रशासनिक परिसर को स्थानांतरित करने के प्रयास
फोर्ट सेंट जॉर्ज से सचिवालय को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने सचिवालय को फोर्ट से बाहर ले जाने की कोशिश की थी। इसके लिए क्वीन मैरी कॉलेज परिसर को संभावित स्थान के रूप में देखा गया था, लेकिन प्रस्ताव के खिलाफ विरोध हुआ और योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बाद 2010 में मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की सरकार ने ओमंदुरार सरकारी एस्टेट में नया विधानसभा-सचिवालय परिसर तैयार कराया। उसी वर्ष विधानसभा की कार्यवाही नए परिसर से शुरू हुई।
हालांकि, 2011 में जयललिता की सरकार सत्ता में लौटने के बाद विधानसभा और सचिवालय को दोबारा फोर्ट सेंट जॉर्ज में स्थानांतरित कर दिया गया। बाद में ओमंदुरार परिसर को बहु-विशेषता अस्पताल में बदल दिया गया।
1,200 करोड़ रुपये के खर्च पर विपक्ष ने उठाए सवाल
नए विधानसभा-सचिवालय परिसर की प्रस्तावित लागत को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। एआईएडीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी ने इस परियोजना की जरूरत और इतने बड़े खर्च को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
विपक्ष का तर्क है कि जब राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर लगातार चिंताएं जताई जा रही हैं और सत्तारूढ़ टीवीके की ओर से करीब 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का मुद्दा उठाया जाता रहा है, तब 1,200 करोड़ रुपये की नई प्रशासनिक इमारत पर खर्च करना कितना उचित है।
वहीं, टीवीके नेता अमेरिकाई नारायणन ने परियोजना का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को कठिन परिस्थितियों के बावजूद आवश्यक फैसले लेने पड़ते हैं।
अब इस प्रस्तावित परियोजना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल इसके अंतिम स्थान, विस्तृत निर्माण योजना और 1,200 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च को लेकर होंगे। सरकार की ओर से इन पहलुओं पर आगे विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।








