देहरादून शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एक महत्वपूर्ण परियोजना पर काम कर रहा है। करीब 716 करोड़ रुपये की लागत से 12 किलोमीटर लंबा चार लेन का ग्रीनफील्ड बाईपास तैयार किया जा रहा है। यह बाईपास दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा और शहर के भीतर से गुजरने वाले भारी यातायात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा।
प्रस्तावित बाईपास झाझरा से शुरू होकर NH-7 के पांवटा साहिब-बल्लूपुर सेक्शन को जोड़ेगा। इसका दूसरा सिरा आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा। परियोजना के अप्रैल 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।
शहर के अंदर कम होगा ट्रैफिक का दबाव
इस बाईपास का सबसे बड़ा उद्देश्य देहरादून के व्यस्त हिस्सों में वाहनों की संख्या कम करना है। नया मार्ग शहर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के लिए एक वैकल्पिक कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
इसके जरिए सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र, विकासनगर, हरबर्टपुर और हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब की ओर जाने वाला यातायात शहर के भीतरी हिस्सों में प्रवेश किए बिना आगे बढ़ सकेगा।
इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले वाहन चालकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। ट्रैफिक कम होने से वाहनों की आवाजाही सुगम होने के साथ प्रदूषण में कमी लाने में भी मदद मिल सकती है।
दिल्ली-NCR से मसूरी जाने वालों को मिलेगी राहत
दिल्ली और एनसीआर से देहरादून होते हुए मसूरी जाने वाले पर्यटकों के लिए भी यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से आने वाले यात्रियों को शहर के ट्रैफिक से होकर गुजरना पड़ता है।
बाईपास शुरू होने के बाद एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को शहर के अंदर जाने की जरूरत कम हो जाएगी। इससे देहरादून से मसूरी की यात्रा में करीब 30 से 40 मिनट तक की बचत होने का अनुमान है।
खास तौर पर सप्ताहांत और लंबी छुट्टियों के दौरान जब देहरादून में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है, तब यह वैकल्पिक मार्ग ट्रैफिक प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकता है।
कई शहरों और राज्यों से बेहतर होगी कनेक्टिविटी
नए बाईपास से देहरादून के अलावा ऋषिकेश, विकासनगर और पांवटा साहिब जाने वाले यात्रियों को भी बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा। वहीं, दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के जरिए हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक क्षेत्रों तक माल की आवाजाही आसान होने से स्थानीय कारोबार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो सकता है।
पर्यावरण को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा प्रोजेक्ट
NHAI ने परियोजना के निर्माण में पर्यावरणीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा है। बाईपास की डिजाइन स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जबकि कुछ हिस्सों में वन क्षेत्र पर प्रभाव कम करने के लिए गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की जाएगी।
सड़क के लिए सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाले 60 मीटर के राइट ऑफ वे की तुलना में यहां इसे घटाकर करीब 30 मीटर रखने की योजना है। इसका उद्देश्य वन क्षेत्र में पेड़ों और प्राकृतिक पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को सीमित करना है।
वन्यजीवों की आवाजाही के लिए भी विशेष व्यवस्था
परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। करीब 350 मीटर लंबा व्हीकुलर ओवरपास (VOP) बनाया जाएगा। इसके अलावा मवेशियों की आवाजाही के लिए अलग कैटल ओवरपास (COP) की व्यवस्था होगी।
प्रोजेक्ट में सात छोटे पुल और 21 बॉक्स कल्वर्ट भी प्रस्तावित हैं। छोटे जीव-जंतुओं, खासकर सरीसृप और उभयचर प्रजातियों की आवाजाही के लिए पांच ह्यूम पाइप कल्वर्ट बनाए जाएंगे।








