मध्य-पूर्व संकट के बीच केंद्र का बड़ा फैसला, ठेकेदारों को राहत और समयसीमा में बढ़ोतरी

नई दिल्ली: वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने ठेकेदारों और सप्लायर्स को बड़ी राहत दी है। Ministry of Finance के अंतर्गत जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में कहा गया है कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण जिन परियोजनाओं में देरी हुई है, उन्हें “फोर्स मेज्योर” के तहत माना जाएगा। इसके चलते संबंधित कंपनियों और ठेकेदारों पर किसी प्रकार का जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य उन कंपनियों को राहत देना है, जो अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण समय पर काम पूरा नहीं कर पा रही हैं। ज्ञापन के अनुसार, असाधारण परिस्थितियों—जैसे युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अन्य वैश्विक संकट—को Force Majeure के अंतर्गत रखा जाता है। ऐसे मामलों में अनुबंध से जुड़े दोनों पक्षों को अस्थायी रूप से जिम्मेदारियों से छूट मिल सकती है।

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल उन्हीं मामलों में लागू होगी, जहां परियोजनाओं में देरी का कारण वास्तव में मध्य-पूर्व की स्थिति से जुड़ा हुआ है। संबंधित विभाग और एजेंसियां हर मामले की अलग-अलग समीक्षा करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फोर्स मेज्योर का उपयोग उचित आधार पर ही किया जा रहा है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जिन परियोजनाओं की समयसीमा 28 फरवरी 2026 या उसके बाद पूरी होनी थी, उन्हें कम से कम दो महीने और अधिकतम चार महीने तक बढ़ाया जा सकता है। इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क या पेनल्टी नहीं लगाई जाएगी। यह निर्णय निर्माण कार्य, सेवाओं और वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े सभी सरकारी अनुबंधों पर लागू होगा।

हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल उन ठेकेदारों को मिलेगी, जो पहले से किसी डिफॉल्ट में नहीं थे। यानी 27 फरवरी 2026 से पहले यदि किसी परियोजना में पहले से ही देरी या अनुबंध उल्लंघन हो चुका था, तो उस पर यह नियम लागू नहीं होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो रही हैं और कई परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण धीमी पड़ गई हैं। ऐसे में सरकार का यह फैसला परियोजनाओं को पूरा करने में सहायक साबित हो सकता है और कंपनियों पर आर्थिक दबाव को कम करेगा।

इस निर्णय से इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह कदम निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करेगा, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लचीली नीतियां अपना रही है।

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