भारत के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक दीर्घकालिक और व्यापक दृष्टिकोण सामने आया है, जिसमें आत्मनिर्भरता, स्वच्छ ऊर्जा और मजबूत बुनियादी ढांचे को केंद्र में रखा गया है। Sagar Adani ने एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान कहा कि देश को आने वाले दशकों के लिए एक मजबूत “एनर्जी बैकबोन” तैयार करने की जरूरत है, जो घरेलू संसाधनों पर आधारित हो।
Adani Green Energy के कार्यकारी निदेशक के रूप में उन्होंने बताया कि भारत में ऊर्जा क्षेत्र में नीतिगत स्थिरता और स्पष्टता देखने को मिल रही है। उनके अनुसार, बुनियादी ढांचे के विकास, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार, ट्रांसमिशन नेटवर्क की मजबूती और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने जैसे कदम देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल ऊर्जा उत्पादन ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को एकीकृत रूप से विकसित करना जरूरी है। इसमें ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब ये सभी क्षेत्र एक साथ काम करते हैं, तभी टिकाऊ विकास और स्थिरता संभव हो पाती है।
Sagar Adani ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को आयातित ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी। उनका मानना है कि देश के भीतर उपलब्ध संसाधनों पर आधारित ऊर्जा ढांचा ही दीर्घकालिक स्थिरता का सबसे विश्वसनीय मार्ग है। उन्होंने कहा कि विद्युतीकरण न केवल अधिक कुशल है, बल्कि यह भारत को भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा भी प्रदान कर सकता है।
इस दिशा में Gautam Adani के नेतृत्व में बड़े स्तर पर निवेश की योजनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता की गई है, जो वैश्विक स्तर पर निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। यह निवेश केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एक समग्र रणनीति का हिस्सा है।
इस रणनीति के तहत बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं, ऊर्जा भंडारण (storage) की सुविधाएं, ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में निवेश किया जा रहा है। इसके अलावा, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, हवाई अड्डे और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में भी विकास को इसी व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की आर्थिक मजबूती उसके बुनियादी ढांचे पर निर्भर करती है। ऊर्जा उद्योग को गति देती है, लॉजिस्टिक्स व्यापार को बढ़ावा देता है और डिजिटल ढांचा उत्पादकता को मजबूत करता है। इन सभी के समन्वय से ही वास्तविक और टिकाऊ विकास संभव होता है।
अंत में Sagar Adani ने विश्वास जताया कि यदि भारत सस्ती, स्वच्छ और पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध कराने में सफल रहता है, तो न केवल देश की 140 करोड़ आबादी को लाभ मिलेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता मिलेगी।








