तेलंगाना की राजनीति में एक बार फिर सियासी माहौल गर्म होता नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी क्रम में मेडक से भाजपा सांसद एम. रघुनंदन राव ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को खुली चुनौती देते हुए विधानसभा भंग कर दोबारा जनता के बीच जाने की बात कही है।
भाजपा सांसद ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को अपने नेतृत्व और सरकार के कामकाज पर भरोसा है तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्य विधानसभा भंग कर देनी चाहिए और नए सिरे से चुनाव कराना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना के सभी आठ भाजपा सांसद भी जनता के फैसले का सम्मान करते हुए अपने पद से इस्तीफा देने और पुनः चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
रघुनंदन राव का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में धान खरीद, किसानों के भुगतान, केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय सहयोग तथा विकास परियोजनाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
भाजपा सांसद ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कई खरीद केंद्रों पर किसानों की उपज अब भी पड़ी हुई है और समय पर खरीद प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इसके अलावा किसानों को भुगतान में भी देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार द्वारा चुनाव के दौरान किए गए कई वादों को अब तक पूरा नहीं किया गया है।
रघुनंदन राव ने कहा कि भाजपा सांसदों से इस्तीफे की मांग करने से पहले राज्य सरकार को यह बताना चाहिए कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में किसान विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं और सरकार को प्राथमिकता के आधार पर इन मुद्दों का समाधान करना चाहिए।
इस दौरान भाजपा नेता ने केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी के खिलाफ कांग्रेस नेताओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्रीय नेताओं के आवास के बाहर प्रदर्शन कर सकते हैं, तो भाजपा कार्यकर्ता भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा मुख्यमंत्री पद की गरिमा का सम्मान करती है, लेकिन इसे पार्टी की कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
वहीं, निजामाबाद से भाजपा सांसद डी. अरविंद ने भी कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश में भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार, जनता अब वैकल्पिक राजनीति की ओर देख रही है और आने वाले वर्षों में तेलंगाना की राजनीतिक तस्वीर में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए तेलंगाना में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला और अधिक तीखा हो सकता है। किसानों से जुड़े मुद्दे, विकास कार्यों की गति और जनकल्याण योजनाओं का प्रभाव आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल, भाजपा नेताओं की ओर से दी गई इस चुनौती ने तेलंगाना के राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस चुनौती का किस प्रकार जवाब देती है और राज्य की जनता इन आरोपों और दावों को किस नजर से देखती है।








