दिल्ली, हरियाणा और यूपी में बड़े हमलों की साजिश नाकाम, ISI से जुड़े मॉड्यूल पर शिकंजा

राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में कथित आतंकी और आपराधिक साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक विशेष अभियान के तहत कई राज्यों में छापेमारी कर नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये आरोपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में थे और संवेदनशील स्थानों पर हमलों की योजना बना रहे थे।

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों का संबंध पाकिस्तान आधारित अपराधी Shahzad Bhatti के मॉड्यूल से बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के निशाने पर दिल्ली का एक ऐतिहासिक मंदिर, हरियाणा का सैन्य कैंप और उत्तर प्रदेश में पुलिस से जुड़े कुछ स्थान थे।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को इस मॉड्यूल की गतिविधियों को लेकर पहले से खुफिया जानकारी मिल रही थी। इसके बाद मार्च के अंत में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। कई दिनों तक तकनीकी निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के बाद पुलिस ने अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ा।

जांच में पता चला है कि दिल्ली के एक प्रमुख धार्मिक स्थल की रेकी की गई थी। आरोप है कि मॉड्यूल से जुड़े एक व्यक्ति ने मंदिर परिसर और वहां तैनात सुरक्षा बलों की तस्वीरें लेकर पाकिस्तान स्थित अपने संपर्कों को भेजी थीं। सूत्रों के मुताबिक, हमलावर वहां मौजूद पुलिस और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।

इसके अलावा दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक प्रसिद्ध ढाबा भी कथित रूप से निशाने पर था। जांच एजेंसियों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले इस स्थान पर ग्रेनेड जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर दहशत फैलाने की साजिश रची गई थी। इस ढाबे पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां इस खुलासे को बेहद गंभीर मान रही हैं।

हरियाणा के हिसार स्थित एक सैन्य कैंप को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। जांच में पता चला कि कैंप की वीडियो रिकॉर्डिंग कर विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेजी गई थी। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के पास से हथियार और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार देश के अन्य हिस्सों तक फैले हैं या नहीं।

इससे पहले अप्रैल में मध्य प्रदेश के ग्वालियर से दो युवकों की गिरफ्तारी भी हुई थी, जिन पर इसी मॉड्यूल के लिए काम करने का आरोप लगा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क युवाओं को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रभावित कर अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा था।

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