तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध अब संवैधानिक बहस का रूप लेता जा रहा है। अभिनेता विजय की पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सरकार बनाने का न्योता नहीं मिलने पर विपक्षी दलों ने राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता Abhishek Manu Singhvi ने राज्यपाल की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है।
तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों में से विजय की पार्टी ने 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। हालांकि बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़े से पार्टी कुछ सीटें पीछे रह गई। इसके बावजूद पार्टी राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में जनता ने बदलाव के संकेत दिए हैं और यही कारण है कि सरकार गठन को लेकर राज्य में लगातार हलचल बनी हुई है।
राज्यपाल Ravindra Narayan Ravi पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने विजय को सरकार बनाने का अवसर देने में अनावश्यक देरी की। सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने समर्थन देने वाले विधायकों की पूरी सूची और बहुमत का स्पष्ट दावा मांगा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने कहा है कि संसदीय लोकतंत्र में सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए और बहुमत का परीक्षण सदन में होना चाहिए।
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यदि कोई दूसरी पार्टी सरकार बनाने का दावा नहीं कर रही है, तो सबसे बड़ी पार्टी को मौका न देना संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ माना जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee का जिक्र किया, जिन्हें 1996 में पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था और बाद में सदन में बहुमत साबित करने का अवसर दिया गया था।
तमिलनाडु की राजनीति में यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य में पहली बार विजय की पार्टी इतनी बड़ी ताकत बनकर सामने आई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटे दलों का समर्थन मिल जाता है तो सरकार गठन का रास्ता साफ हो सकता है। दूसरी ओर, विपक्ष यह आरोप लगा रहा है कि राजनीतिक दबाव के कारण प्रक्रिया लंबी खींची जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य की राजनीति में लगातार बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। विभिन्न दल अपने-अपने विकल्प तलाश रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में राज्यपाल की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी निर्णय में संवैधानिक मूल्यों का पालन आवश्यक है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। यदि समर्थन जुटाने की प्रक्रिया तेज होती है तो जल्द ही सरकार गठन को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। वहीं अगर विवाद बढ़ता है तो मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है।








