तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। फिल्म सुपरस्टार से नेता बने Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा अभी भी उसके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले तीन दिनों से राज्य की राजनीति पूरी तरह इस सवाल पर टिकी हुई है कि आखिर कौन-सी पार्टी विजय का साथ देगी और कौन दूरी बनाए रखेगी।
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में टीवीके ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े से कुछ सीटें पीछे रह गई। ऐसे में विजय ने छोटे दलों और सहयोगी पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश तेज कर दी। शुरुआत में माना जा रहा था कि कुछ क्षेत्रीय दल टीवीके को समर्थन देकर सरकार बनाने का रास्ता आसान कर देंगे, लेकिन हालात धीरे-धीरे बदलते दिखाई दिए।
सबसे पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम ने साफ कर दिया कि वे फिलहाल टीवीके को समर्थन नहीं देंगे। इन दोनों दलों के इस रुख ने विजय की रणनीति को बड़ा झटका दिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि इन दलों के समर्थन से टीवीके बहुमत के करीब पहुंच सकती थी, लेकिन आखिरी समय में मामला अटक गया।
इसके बाद अब सबकी नजरें Viduthalai Chiruthaigal Katchi यानी वीसीके पर टिक गई हैं। पार्टी के दो विधायक इस समय तमिलनाडु की राजनीति में “किंगमेकर” की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि विजय लगातार वीसीके नेतृत्व से संपर्क बनाए हुए हैं और जल्द ही दोनों नेताओं के बीच अहम बैठक हो सकती है।
वीसीके प्रमुख Thol Thirumavalavan अभी खुलकर किसी पक्ष में नहीं आए हैं। माना जा रहा है कि वे अपने सहयोगियों और पार्टी नेताओं से सलाह लेने के बाद ही अंतिम फैसला करेंगे। दूसरी ओर, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी Dravida Munnetra Kazhagam भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि वीसीके समर्थन देती है तो विजय के लिए सरकार बनाने का रास्ता काफी आसान हो सकता है। लेकिन अगर समर्थन नहीं मिला, तो टीवीके को विपक्ष में बैठना पड़ सकता है। यही वजह है कि राज्य की राजनीति में हर घंटे समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखा दिया है कि फिल्मों में बड़े पर्दे पर सफलता हासिल करने वाले विजय के लिए राजनीति का सफर इतना आसान नहीं है। जनता के बीच लोकप्रियता होने के बावजूद सत्ता तक पहुंचने के लिए गठबंधन और राजनीतिक संतुलन की अहम भूमिका होती है।








