मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा ईडी हिरासत में, अदालत ने 7 दिन की पूछताछ की अनुमति दी

पंजाब सरकार में मंत्री और कारोबारी Sanjeev Arora को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा झटका लगा है। गुरुग्राम की जिला एवं सत्र अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को संजीव अरोड़ा की सात दिन की हिरासत दे दी है। यह मामला कथित फर्जी मोबाइल फोन निर्यात और विदेशों से संदिग्ध धनराशि के लेनदेन से जुड़ा बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, ईडी ने शुक्रवार देर रात संजीव अरोड़ा को अदालत में पेश किया। एजेंसी ने पूछताछ के लिए 10 दिन की हिरासत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने सात दिन की ईडी कस्टडी मंजूर की। अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच एजेंसी को धन के स्रोत, लेनदेन की प्रक्रिया और आरोपियों की भूमिका का पता लगाने के लिए विस्तृत पूछताछ की आवश्यकता है।

ईडी की ओर से अदालत में पेश रिमांड नोट में दावा किया गया कि हैम्पटन स्काई रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के खिलाफ जांच के दौरान संदिग्ध विदेशी लेनदेन की जानकारी मिली थी। एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 157 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन बिक्री का रिकॉर्ड दिखाया। इनमें से लगभग 102 करोड़ रुपये संयुक्त अरब अमीरात स्थित दो कंपनियों — फोर्टबेल टेलीकॉम और ड्रैगन टेलीकॉम — को भेजे गए बताए गए हैं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस लेनदेन में शामिल कई कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं। ईडी के मुताबिक, कई सप्लायर कंपनियां या तो अस्तित्व में नहीं थीं, या फिर उनकी आर्थिक क्षमता इतनी बड़ी डील करने की नहीं थी। इन कंपनियों पर बिना वास्तविक माल सप्लाई किए फर्जी बिल जारी करने का आरोप लगाया गया है।

ईडी ने अदालत को यह भी बताया कि जांच के दौरान कई ऐसी कंपनियों का पता चला जिनके जीएसटी पंजीकरण कुछ समय बाद ही निलंबित कर दिए गए थे। कई संस्थाएं आयकर रिटर्न भी दाखिल नहीं कर रही थीं। एजेंसी का मानना है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर धन को इधर-उधर करने के लिए किया गया।

मामले की जांच के दौरान संजीव अरोड़ा के बेटे काव्या अरोड़ा का बयान भी सामने आया। जांच एजेंसी के अनुसार, काव्या अरोड़ा ने कहा कि उन्हें मोबाइल फोन निर्यात कारोबार की जानकारी नहीं थी और वे केवल परिवार के रियल एस्टेट कारोबार को संभालते थे। ईडी का कहना है कि हैम्पटन स्काई रियल्टी मूल रूप से रियल एस्टेट कंपनी है और उसने अचानक वर्ष 2023-24 में मोबाइल फोन निर्यात का कारोबार शुरू किया, जिससे संदेह और बढ़ गया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला बनता है और एजेंसी को कथित अपराध से जुड़े पैसों की पूरी कड़ी समझने की जरूरत है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हिरासत के दौरान आरोपी का नियमित मेडिकल परीक्षण कराया जाए।

साथ ही अदालत ने आरोपी के वकील को प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच मुलाकात की अनुमति दी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना अनुमति संजीव अरोड़ा की हिरासत किसी अन्य एजेंसी को नहीं सौंपी जा सकती।

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