पतंजलि का बड़ा शोध: दालचीनी में छिपा है मधुमेह नियंत्रण का प्राकृतिक सूत्र

हरिद्वार, 13 मई। पतंजलि योगपीठ के वैज्ञानिकों की ओर से दालचीनी पर किए गए महत्वपूर्ण अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता मिली है। अमेरिका के प्रतिष्ठित जर्नल Elsevier के Food Research International ने पतंजलि के इस शोध को स्वीकार करते हुए इस बात पर मुहर लगाई है कि दालचीनी में मौजूद जैव सक्रिय तत्व मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। इस उपलब्धि को आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पतंजलि के वैज्ञानिक लंबे समय से दालचीनी के औषधीय गुणों और उसके स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध कर रहे थे। अनुसंधान प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी वैज्ञानिक तथ्यों और निष्कर्षों को Food Research International जर्नल के पास भेजा गया, जहां कठोर समीक्षा प्रक्रिया के बाद इसे स्वीकार किया गया। जर्नल ने विशेष रूप से दालचीनी के जैव सक्रिय तत्वों की उपलब्धता, मधुमेह नियंत्रण में उसकी भूमिका तथा विभिन्न खाद्य पदार्थों के साथ उसके उपयोग की प्रभावशीलता को मान्यता दी है।

आयुर्वेद में दालचीनी के गुणों का उल्लेख हजारों वर्षों से मिलता रहा है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में कहा गया है—

“उक्ता दारुसिता स्वाद्वी तिक्ता चानिलपित्तहृत्।
सुरभि: शुक्रला बल्या मुखशोषतृषापहा।।
(भा.प्र.नि. कर्पूरादिवर्ग ६६-६७)”

अर्थात दालचीनी वायु और पित्त का संतुलन बनाने वाली, बलवर्धक तथा शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाली औषधि मानी गई है। वर्षों से आयुर्वेद में इसके गुणों का उपयोग होता रहा है, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान ने भी इसके प्रभावों को स्वीकार करना शुरू कर दिया है।

पतंजलि के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में दालचीनी के सुरक्षित उपयोग, विभिन्न खाद्यान्नों के साथ उसके संयोजन और शरीर पर उसके प्रभावों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण किया। यह पहली बार है जब इस प्रकार के अनुसंधान को विश्व स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ने स्वीकार किया है। Food Research International खाद्य विज्ञान, पोषण, जैव सक्रिय तत्वों और स्वास्थ्य प्रभावों से जुड़े शोधों के लिए विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में गिनी जाती है। इसमें प्रकाशित शोध कठोर वैज्ञानिक समीक्षा प्रक्रिया से गुजरते हैं, इसलिए यहां शोध प्रकाशित होना बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

इस उपलब्धि पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि ऐसे परिणाम प्रस्तुत करना है जो मानव जीवन की गंभीर बीमारियों के लिए प्राकृतिक समाधान दे सकें। उन्होंने कहा कि प्रकृति में स्वास्थ्य का संपूर्ण समाधान निहित है और आयुर्वेद उसी प्रकृति के नियमों को विज्ञान की भाषा में प्रस्तुत करता है। दालचीनी पर किया गया यह शोध उसी सत्य को पुनः स्थापित करता है।

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