भारत ने वैश्विक स्वास्थ्य मंच पर एक बार फिर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए डिजिटल हेल्थ, सस्ती चिकित्सा सेवाओं और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के क्षेत्र में अपने प्रयासों को दुनिया के सामने रखा। विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश में तेजी से विकसित हो रहे स्वास्थ्य ढांचे, डिजिटल तकनीक के उपयोग और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के मॉडल पर विस्तार से जानकारी दी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का डिजिटल हेल्थ मॉडल विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रहा है।
भारत ने अपने संबोधन में बताया कि देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का विस्तार किया गया है। इन केंद्रों के जरिए ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जांच, इलाज और स्वास्थ्य परामर्श जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे बड़े अस्पतालों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल रही है।
डिजिटल हेल्थ मिशन को भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया गया। इस पहल के तहत करोड़ों लोगों को डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई गई है, जिससे मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करने में आसानी होगी और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से मरीजों को बार-बार मेडिकल दस्तावेज साथ लेकर चलने की जरूरत कम होगी। किसी भी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में डिजिटल माध्यम से मेडिकल इतिहास उपलब्ध हो सकेगा, जिससे इलाज की प्रक्रिया तेज और बेहतर बन सकती है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह भी रखा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। गांवों और छोटे कस्बों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पहुंचाना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी दिशा में टेलीमेडिसिन और डिजिटल परामर्श सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के बाद दुनिया भर में डिजिटल हेल्थ सिस्टम की जरूरत और अधिक बढ़ी है। भारत ने कोविड काल के दौरान वैक्सीनेशन, डिजिटल प्रमाणपत्र और दवाओं की आपूर्ति के क्षेत्र में तकनीक का व्यापक उपयोग किया था। इसी अनुभव के आधार पर अब स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है।
भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी जोर दिया। अधिकारियों के अनुसार, एआई आधारित तकनीक भविष्य में रोगों की जल्दी पहचान, मेडिकल रिसर्च और मरीजों की निगरानी में बड़ी भूमिका निभा सकती है। हालांकि इसके साथ नैतिकता, डेटा सुरक्षा और समान पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी बताया गया।
विश्व स्वास्थ्य मंच पर भारत ने वैक्सीन उत्पादन और दवा आपूर्ति में अपनी भूमिका का भी उल्लेख किया। भारत लंबे समय से कई देशों को किफायती दवाएं और टीके उपलब्ध कराता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को मजबूती मिली है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल निवेश से आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है। हेल्थ टेक्नोलॉजी, मेडिकल डेटा मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं से नए रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की अपील भी की। विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी, नई बीमारियों और स्वास्थ्य आपदाओं से निपटने के लिए देशों के बीच तकनीक, रिसर्च और संसाधनों का साझा उपयोग बेहद जरूरी है।








