गुवाहाटी में वन्यजीव तस्करी का बड़ा खुलासा, बांस की नलियों में छिपाकर ले जाए जा रहे थे दुर्लभ गेको

Guwahati में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए गए अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में 26 जीवित गेको (छिपकली की दुर्लभ प्रजाति) को बरामद किया गया, जिन्हें बांस की पतली नलियों में छिपाकर अवैध तरीके से ले जाया जा रहा था। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

यह कार्रवाई गुवाहाटी के बेटकुची इलाके में शुक्रवार देर शाम की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ लोग दुर्लभ वन्यजीवों की तस्करी करने वाले हैं। सूचना के बाद पुलिस टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध व्यक्तियों की जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया, जिनकी पहचान मोहम्मद इकरामुल हुसैन और मोहम्मद जमीरुद्दीन के रूप में हुई। दोनों क्रमशः Assam के नगांव और बारपेटा जिलों के निवासी बताए गए हैं।

तलाशी के दौरान पुलिस को 26 बांस की नलियां मिलीं, जिन्हें स्थानीय भाषा में “सुंगा” कहा जाता है। प्रत्येक नली को जाल और कपड़े से इस तरह लपेटा गया था कि अंदर क्या रखा है, इसका आसानी से पता न चल सके। जब अधिकारियों ने नलियों को खोला तो उनमें जीवित गेको पाए गए। पुलिस का कहना है कि इन जीवों को बेहद सावधानी से छिपाया गया था ताकि तस्करी के दौरान किसी को शक न हो।

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह मामला किसी संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कुछ दुर्लभ गेको प्रजातियों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में भारी मांग होती है। इन्हें कई बार अंधविश्वास, पारंपरिक दवाओं और विदेशी पालतू जानवरों के कारोबार में इस्तेमाल किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीव तस्करी केवल जैव विविधता के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे पर्यावरण संतुलन भी प्रभावित होता है। गेको जैसे जीव प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

पुलिस ने बरामद सभी गेको को सुरक्षित कब्जे में लेकर वन विभाग को सौंप दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इन जीवों की चिकित्सकीय जांच कर उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में वापस छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तस्करी का यह नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

वन्यजीव अपराधों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत जैव विविधता के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यहां कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसके कारण यह इलाका वन्यजीव तस्करों के निशाने पर रहता है। ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी माना जाता है।

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