कनाडा में एक दुर्लभ और दर्दनाक घटना में Hrishikesh Koloth नामक भारतीय युवक की भालू के हमले में मौत हो गई। केरल के रहने वाले 27 वर्षीय ऋषिकेश कोलोथ कनाडा में अपने बेहतर भविष्य और खेल करियर के सपने को पूरा करने के लिए गए थे। लेकिन एक खतरनाक जंगली हमले ने उनकी जिंदगी और उनके सपनों दोनों को अचानक खत्म कर दिया।
यह घटना कनाडा के सस्केचेवान प्रांत के एक दूरदराज इलाके में हुई, जहां ऋषिकेश एक यूरेनियम एक्सप्लोरेशन साइट पर कॉन्ट्रैक्ट टेक्नीशियन के रूप में काम कर रहे थे। बताया गया कि यह इलाका घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। घटना के समय वे अपने कार्यस्थल पर मौजूद थे, तभी अचानक एक भालू ने उन पर हमला कर दिया।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हमले के तुरंत बाद वहां मौजूद एक कर्मचारी ने आत्मरक्षा और अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भालू को गोली मार दी। बाद में वन्यजीव विभाग ने भालू के शव को जांच के लिए भेज दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हमले के पीछे कोई असामान्य परिस्थिति या स्वास्थ्य संबंधी कारण तो नहीं था।
Hrishikesh Koloth केवल एक तकनीकी कर्मचारी ही नहीं थे, बल्कि वे एक उभरते हुए मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स फाइटर भी थे। परिवार और दोस्तों के अनुसार वे पिछले दस वर्षों से लगातार बॉक्सिंग और MMA की ट्रेनिंग ले रहे थे। उनका सबसे बड़ा सपना दुनिया की प्रतिष्ठित UFC प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था।
तीन साल पहले वे कनाडा अपने बड़े भाई अर्जुन के पास रहने के लिए गए थे। उनके भाई ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि ऋषिकेश बेहद मेहनती और अनुशासित खिलाड़ी थे। उन्होंने बताया कि परिवार और उनके ट्रेनर्स को पूरा विश्वास था कि एक दिन वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करेंगे।
ऋषिकेश कनाडा के एक मार्शल आर्ट्स क्लब में नियमित ट्रेनिंग लेते थे और वहां के कोच तथा साथी खिलाड़ी भी उनके प्रदर्शन से काफी प्रभावित थे। उनके अचानक निधन की खबर से खेल जगत और भारतीय समुदाय में शोक की लहर फैल गई है।
घटना के बाद कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दुखद घटना से पूरी टीम सदमे में है। कंपनी ने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने की बात भी कही है।
स्थानीय पुलिस, वन्यजीव अधिकारी और कोरोनर विभाग संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सस्केचेवान क्षेत्र में भालू के हमले से मौत की घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं। रिकॉर्ड के अनुसार यह प्रांत के इतिहास में चौथी ऐसी घटना है जिसमें किसी व्यक्ति की जान गई हो।
इस हादसे ने एक बार फिर दूरदराज के जंगल क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों वाले इलाकों में काम करने वाले लोगों को विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण, ट्रैकिंग सिस्टम और आपातकालीन बचाव उपकरण उपलब्ध कराना जरूरी है।








