अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने बुधवार को आयोजित कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में आने वाले वर्षों के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि समूह अब परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा सेंटर, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रहा है। उनका मानना है कि आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और मजबूत बुनियादी ढांचा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत बनने वाले हैं।
बैठक को संबोधित करते हुए गौतम अडानी ने कहा कि अडानी समूह ने हमेशा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी विकास का रास्ता चुना है। उन्होंने कहा, “हमने उस समय निर्माण किया जब परिस्थितियां सबसे कठिन थीं और आज हम भविष्य की नई संभावनाओं को लेकर पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़े हैं।”
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अडानी समूह की एंट्री
AGM की सबसे बड़ी घोषणा परमाणु ऊर्जा को लेकर रही। गौतम अडानी ने बताया कि समूह ने “अडानी एटॉमिक एनर्जी” के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है। इसके लिए जमीन की पहचान की जा चुकी है और कंपनी वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से बढ़ते उद्योगों, डेटा सेंटर और डिजिटल अर्थव्यवस्था की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वच्छ और निरंतर बिजली उत्पादन बेहद आवश्यक है। परमाणु ऊर्जा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है।
AI और डेटा सेंटर पर बड़ा दांव
गौतम अडानी ने अपने संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भारत के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक बताया। उन्होंने कहा कि सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि उसे सपोर्ट करने वाला मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही जरूरी है।
अडानी समूह अब डेटा सेंटर कारोबार को तेजी से बढ़ाने पर काम कर रहा है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक 3 गीगावाट डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा विशाखापत्तनम में गीगावाट स्तर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ी वैश्विक तकनीकी कंपनी के साथ समझौता भी किया गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में AI की बढ़ती मांग के कारण डेटा प्रोसेसिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर में 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश
अडानी समूह ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बुनियादी ढांचे के विकास में 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। गौतम अडानी के अनुसार यह देश के कुल निजी क्षेत्र के पूंजीगत निवेश का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है।
ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक विशाल विस्तार योजना पर काम कर रही है। अगले पांच वर्षों में अडानी पावर 45 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना बना रही है।
बंदरगाह और हवाई अड्डों में रिकॉर्ड प्रदर्शन
अडानी पोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 में 500 मिलियन टन से अधिक कार्गो हैंडल किया है और कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इसे बढ़ाकर एक अरब टन तक पहुंचाना है।
वहीं, केरल स्थित विजिनजाम बंदरगाह ने अपने पहले ही वर्ष में 10 लाख कंटेनरों (TEUs) का आंकड़ा पार कर लिया है, जो इसे देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले बंदरगाहों में शामिल करता है।
एविएशन सेक्टर में भी समूह तेजी से विस्तार कर रहा है। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और गुवाहाटी एयरपोर्ट का नया टर्मिनल इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां मानी जा रही हैं। नवी मुंबई एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां हर साल लगभग 9 करोड़ यात्रियों के आने-जाने की क्षमता होगी।
रक्षा और एयरोस्पेस में भी बढ़ रहा दायरा
गौतम अडानी ने बताया कि कंपनी रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भी तेजी से अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। हेलीकॉप्टर, क्षेत्रीय विमान, ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी की जा रही है।
वित्तीय प्रदर्शन भी रहा मजबूत
अडानी समूह का वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत रहा है। कंपनी का कुल राजस्व बढ़कर 2.92 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। गौतम अडानी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चुनौतियों और जांच के बावजूद निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ा है और यही समूह की सबसे बड़ी ताकत है।








