कोलकाता गोदाम हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 11, राहत और बचाव अभियान जारी

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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है, जबकि कई घायल अभी भी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, हादसे के बाद से राहत एवं बचाव अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), दमकल विभाग, पुलिस और सेना की संयुक्त टीमें घटनास्थल पर तैनात हैं। मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। सेना द्वारा ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) सिस्टम की मदद से मलबे के भीतर जीवन के संकेत खोजने का प्रयास किया जा रहा है।

बचाव दल ने गुरुवार सुबह पांच और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिसके बाद अब तक कुल 30 लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है। हालांकि लगातार बारिश के कारण राहत कार्यों में कुछ समय के लिए बाधा भी आई। इसके बावजूद बचावकर्मियों ने अभियान जारी रखा और हर संभव संसाधन का इस्तेमाल किया।

घटना में घायल हुए 19 लोगों का विभिन्न सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राज्य सरकार ने घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस गोदाम का निर्माण किया जा रहा था, वह एक लीज पर ली गई जमीन पर स्थित था। हादसे के बाद प्रशासन ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं निर्माण संबंधी नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई थी।

पुलिस ने मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें गोदाम का मालिक, निर्माण से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञ, एक सुपरवाइजर और श्रमिक आपूर्ति से जुड़े कुछ लोग शामिल हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि हादसे के पीछे की वास्तविक वजह जानने के लिए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर जांच की जा रही है। यदि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन या लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस दुखद घटना ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से हो रहे शहरी विकास के बीच निर्माण कार्यों में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना बेहद आवश्यक है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान बचाव अभियान और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

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