राहुल गांधी के ‘विदेशी मदद’ वाले बयान पर किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले- दुश्मनों का एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं 2
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए ‘विदेशी मदद’ वाले बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी मदद के सहारे सत्ता में आए और अब भी उन्हें विदेशी समर्थन हासिल है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी थी। अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
रिजिजू ने राहुल गांधी पर भारत के विरोधियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया और उनकी खुली बहस की चुनौती पर भी तंज कसा। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
Rahul Gandhi foreign help statement को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी मदद मिलने के आरोप पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा पलटवार किया है। रिजिजू ने राहुल गांधी पर भारत के दुश्मनों का एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है।
Rahul Gandhi foreign help statement पर किरेन रिजिजू का तीखा जवाब
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी के बयान का जवाब देते हुए उनकी तुलना अलग-अलग विचारधाराओं के ऐसे समूहों से की, जिनके कथित विरोधाभासों पर उन्होंने सवाल उठाए।
रिजिजू ने लिखा कि इस तरह की बातें करना वैसा ही है जैसे कट्टरपंथी लोग धर्मनिरपेक्षता की बात करें, अलगाववादी तिरंगा लेकर खड़े हों और अराजकतावादी संविधान की किताब दिखाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के दुश्मनों का एजेंडा आगे बढ़ाने वाले लोग ही दूसरों पर विदेशी समर्थन लेने का आरोप लगा रहे हैं।
रिजिजू ने राहुल गांधी की बहस की चुनौती पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उच्च स्तर की बहस परिपक्व लोगों के बीच होती है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी थी खुली बहस की चुनौती
दरअसल, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी विदेशी मदद के कारण प्रधानमंत्री बने और विदेशी समर्थन के सहारे ही पद पर बने हुए हैं।
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि देश की वित्तीय व्यवस्था पर विदेशियों का नियंत्रण और समर्थन है तथा विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रधानमंत्री का समर्थन करते हैं। हालांकि, ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं और उनके समर्थन में पोस्ट में कोई विस्तृत प्रमाण पेश नहीं किया गया था।
अपने बयान में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को किसी भी मंच और किसी भी समय खुली बहस करने की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि वह इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा के लिए तैयार हैं।
Rahul Gandhi foreign help statement से पहले पीएम मोदी ने विपक्ष पर साधा था निशाना
इस पूरे विवाद की शुरुआत 31 अक्टूबर को गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रम से हुई थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार की नीतियों का विरोध करना है, लेकिन विपक्ष अब विरोधी पक्ष के बजाय अवरोध पक्ष बनता जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया था कि कुछ ताकतें देश को बांटने और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने विदेशों में होने वाली मुलाकातों और भारत विरोधी ताकतों के समर्थन को लेकर भी सवाल उठाए थे।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा था कि अफवाहें फैलाने और देश की छवि खराब करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ा सियासी टकराव
प्रधानमंत्री के बयान के बाद राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और फिर किरेन रिजिजू के पलटवार ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। एक तरफ कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर विदेशी समर्थन लेने का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा नेता राहुल गांधी के बयानों को भारत विरोधी ताकतों के एजेंडे से जोड़कर निशाना साध रहे हैं।
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राहुल गांधी की खुली बहस की चुनौती और किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया ने इस राजनीतिक विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
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