पश्चिम बंगाल के बारुईपुर क्षेत्र में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में से एक प्रमुख आरोपी की मौत हो गई है। घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है, जबकि पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।
जानकारी के अनुसार, बच्ची 4 जुलाई को अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने काफी तलाश के बाद उसकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी। अगले दिन, 5 जुलाई को, बच्ची का शव सूरज्यापुर हाट क्षेत्र में एक बोरे के भीतर मिला। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया और स्थानीय लोगों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बारुईपुर-जयनगर रोड को जाम कर दिया, कई स्थानों पर टायर जलाकर विरोध जताया और कुछ पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी।
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि सीसीटीवी फुटेज में मुख्य आरोपी को घटना से पहले बच्ची के साथ देखा गया था। इसी आधार पर उसे मामले का प्रमुख संदिग्ध माना गया। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान आनंद सरदार, दिबाकर सरदार और एक अन्य आरोपी के रूप में हुई। अधिकारियों के अनुसार, सभी आरोपियों से पूछताछ कर घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है।
घटना के बाद तनाव उस समय और बढ़ गया, जब बच्ची का शव मिलने के कुछ घंटों बाद भीड़ ने एक व्यक्ति को बच्ची की हत्या में शामिल होने के संदेह में पीट-पीटकर मार डाला। बाद में प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि प्रारंभिक जांच में वह व्यक्ति इस अपराध में शामिल नहीं पाया गया था।
राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी का उद्देश्य घटना से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष और गहन जांच करना है, ताकि दोषियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।
इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्ची की मौत के बाद भीड़ द्वारा जिस व्यक्ति की हत्या की गई, वह प्रारंभिक जानकारी के अनुसार निर्दोष था। इसलिए इस घटना की भी अलग से जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लगभग 200 ऐसे लोगों की पहचान की है, जिन पर सरकारी संपत्ति, पुलिस वाहनों और रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर कड़ी की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी बच्ची के परिवार को जल्द न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।








