भारत-इंडोनेशिया रक्षा संबंधों को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने पर बनी सहमति

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भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देते हुए दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली के अधिग्रहण को लेकर महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान लिया गया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग सहित एक दर्जन से अधिक समझौतों पर सहमति बनी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा। साथ ही, इससे भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच विस्तृत वार्ता हुई। बैठक के बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

राष्ट्रपति प्रबोवो ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में शामिल हैं और दोनों के बीच बढ़ता सहयोग पूरे क्षेत्र की शांति, स्थिरता और विकास के लिए लाभदायक होगा।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में नई ऊर्जा आई है। वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देश उल्लेखनीय प्रगति कर रहे हैं।

क्या है ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत?

ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सबसे उन्नत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणालियों में से एक मानी जाती है। इसका निर्माण ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जो भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त सहयोग से संचालित कंपनी है।

यह मिसाइल जमीन, युद्धपोत, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान—चारों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है। इसकी गति ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तक पहुंच सकती है, जिससे इसे रोकना या इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन माना जाता है। यही कारण है कि इसे आधुनिक रक्षा प्रणालियों में अत्यंत प्रभावी हथियार माना जाता है।

भारत के रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

इंडोनेशिया इस मिसाइल प्रणाली को अपनाने वाला तीसरा विदेशी देश बनने जा रहा है। इससे पहले फिलीपींस और वियतनाम भी ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली को अपने रक्षा तंत्र में शामिल कर चुके हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में स्थिति और मजबूत होगी तथा “मेक इन इंडिया” और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

समुद्री सुरक्षा में होगी मजबूती

इंडोनेशिया दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के निकट स्थित है। ऐसे में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली उसकी तटीय सुरक्षा और समुद्री रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा के संदर्भ में इस प्रणाली को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दो लोकतांत्रिक देशों के रिश्तों को नई दिशा

प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया पहुंचने पर विशेष स्वागत किया गया। इंडोनेशियाई वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को देश के हवाई क्षेत्र में एस्कॉर्ट किया, जबकि राष्ट्रपति प्रबोवो स्वयं एयरबेस पर उनका स्वागत करने पहुंचे। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और मजबूत होते संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया की संसद के सदस्यों को संबोधित करने और वहां रह रहे भारतीय समुदाय से मुलाकात करने का भी कार्यक्रम है।

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ता सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान कर सकता है।

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