सिनेमा का कड़क अंदाज़ खामोश… ‘नाना’ का 75 वर्ष में निधन, उत्तराखंड में बसने का सपना रह गया अधूरा
- उत्तराखंड से रहा है उनका खास लगाव, शूटिंग से लेकर मां गंगा की आरती में हो चुके हैं शामिल
देहरादून/गोवा:
भारतीय सिनेमा जगत के लिए आज सुबह का सूरज एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर लेकर आया। अपनी बेबाक शैली, दमदार डायलॉग डिलीवरी और रोंगटे खड़े कर देने वाले अभिनय से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले ‘नाना’ अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है। वहीं, उनका उत्तराखंड की धरती से काफी लगाव रहा है। वे शूटिंग के लिए उत्तराखंड आ चुके हैं। मां गंगा की आरती में भी शामिल हो चुके हैं। उनका प्रदेश में बसने का सपना भी अधूरा रह गया।
वे इन दिनों गोवा स्थित अपने आवास पर मौजूद थे। आज तड़के अचानक सीने में तेज दर्द और कार्डियक अरेस्ट की शिकायत के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ी। परिजनों द्वारा तुरंत मेडिकल टीम को सूचित किया गया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए अथक प्रयास किए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस आकस्मिक और चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद से उनके परिवार और करीबी लोगों में गहरा सदमा है।
अभिनय की एक ऐसी पाठशाला, जिसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं

नाना पाटेकर का नाम सुनते ही परदे पर उनकी वह गंभीर आंखें, तीखे तेवर और शब्दों को उनके पूरे वजन के साथ बोलने का अनूठा अंदाज जहन में उतर आता है। उन्होंने कभी भी भीड़ का हिस्सा बनकर लीक पर चलना पसंद नहीं किया, बल्कि वे जिस भी किरदार में उतरे, उसे जीवंत कर अमर बना दिया। ‘क्रान्तिवीर’ का प्रताप हो, ‘अंगार’ का गुस्सा, ‘परिंदा’ का खूंखार अन्ना या फिर उनकी अन्य कलात्मक प्रस्तुतियां उन्होंने हर विधा में अपने अभिनय का ऐसा लोहा मनवाया जिसकी काट आज भी किसी के पास नहीं है। वे सिर्फ एक मंजे हुए अभिनेता ही नहीं थे बल्कि एक ऐसे कलाकार थे जो अपनी शर्तों और उसूलों पर जिंदगी जिए। फिल्मों की चकाचौंध से कोसों दूर वे जमीन से जुड़े रहे और असल जिंदगी में भी किसानों, मजदूरों और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा सबसे आगे खड़े नजर आए।
शोक में डूबी फिल्म इंडस्ट्री
एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने अपनी कला के दम पर देश के सर्वोच्च सम्मान और कई राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए, उसका इस तरह अचानक चले जाना हर किसी को अंदर से तोड़ गया है। उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा स्तंभ खो दिया है जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। भले ही आज नाना पाटेकर शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं लेकिन पर्दे पर निभाए गए उनके वे जादुई किरदार और उनकी गूंजती हुई आवाज हमेशा सिने प्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेगी।
उत्तराखंड से ‘नाना’ का रहा है काफी लगाव
अभिनेता नाना पाटेकर सितंबर-अक्टूबर 2022 के दौरान एक मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में उत्तराखंड आए थे। चमोली जिले की चीन सीमा से सटी प्रसिद्ध नीती घाटी (जोशीमठ क्षेत्र) में उनकी फिल्म के दृश्य फिल्माए गए थे। जहां उन्होंने करीब 9 दिनों तक शूटिंग की थी। इसके अलावा उनकी शूटिंग केदारनाथ धाम, नारायणकोटी, देवर गांव और चोपता-बनियाकुंड (रुद्रप्रयाग) के इलाकों में भी हुई थी। उत्तराखंड की वादियों से उनका गहरा जुड़ाव हो गया था। शूटिंग के दौरान उन्होंने जोशीमठ क्षेत्र में जमीन खरीदकर भविष्य में यहीं बसने और एक घर बनाने की इच्छा भी जताई थी। उन्हें यहां का पहाड़ी खानपान (जैसे मंडुवे की रोटी और राई-पालक की सब्जी) बेहद पसंद आया था। इस यात्रा के दौरान उन्होंने केदारनाथ धाम के दर्शन किए थे और ऋषिकेश में गंगा आरती में भी हिस्सा लिया था।








