आंध्र प्रदेश में पूर्व विधानसभा स्पीकर और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के वरिष्ठ नेता थम्मिनेनी सीताराम के परिवार का नाम कथित भूमि फर्जीवाड़े के एक मामले में सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। श्रीकाकुलम पुलिस ने इस मामले में व्यापक जांच शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि जमीन पर अवैध कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज, नकली मृत्यु प्रमाण पत्र और झूठे कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र तैयार किए गए।
क्या है पूरा मामला?
श्रीकाकुलम जिले के चापुरम ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित लगभग 900 वर्ग गज के एक खाली भूखंड को कथित रूप से निशाना बनाया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जमीन के वास्तविक मालिक को मृत दिखाने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया। इसके बाद नकली पारिवारिक और उत्तराधिकारी दस्तावेज बनाकर जमीन के स्वामित्व को अवैध तरीके से स्थानांतरित करने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक ऐसे व्यक्ति को परिवार का सदस्य बताया गया, जिसका वास्तविक भूमि मालिक से कोई संबंध नहीं था।
थम्मिनेनी सीताराम के परिवार की भूमिका की जांच
पुलिस के अनुसार, कथित रूप से तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर जमीन का पंजीकरण थम्मिनेनी सीताराम के पुत्र थम्मिनेनी वेंकट श्रीरामुलु चिरंजीवी नाग (नानी) के नाम पर कराया गया।
इस मामले में पुलिस पूर्व स्पीकर थम्मिनेनी सीताराम, उनकी पत्नी थम्मिनेनी वाणी और उनके पुत्र की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की मिलीभगत या कानूनी उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब तक कितने लोगों पर कार्रवाई?
पुलिस ने इस मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें सीताराम के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:
- अदाबाला रजनी
- तेलुगु सतीश कुमार
- सालिपिल्ली लक्ष्मण राव
- मुदाडला उपेंद्र कुमार
- जेगुरुपति उपेंद्र राव
- मामिडी गोपालकृष्ण
- सांभाना सांबसिवा राव
- कुना पेद्दिराजु
पुलिस ने जांच के दौरान कथित रूप से इस्तेमाल किए गए फर्जी रबर स्टांप, मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
जांच में सामने आए अहम खुलासे
पुलिस का कहना है कि संपत्ति के पंजीकरण के दौरान जिन गवाहों के हस्ताक्षर दिखाए गए, उनका वास्तविक भूमि मालिकों से कोई संबंध नहीं था। यह भी जांच की जा रही है कि क्या संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना पंजीकरण किया गया था।
यदि किसी सरकारी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अन्य मामलों की भी होगी जांच
जांच एजेंसियों को आशंका है कि आरोपियों ने इसी तरह की फर्जीवाड़े की तकनीक का इस्तेमाल अन्य संपत्तियों के मामलों में भी किया हो सकता है। इसलिए पुलिस पुराने भूमि पंजीकरण रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास लंबे समय से खाली पड़ी जमीन है, तो उसके दस्तावेजों की नियमित जांच करते रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
पुलिस का बयान
श्रीकाकुलम के पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है और मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।








