कावेरी नदी जल विवाद एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में आ गया है। शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में मेकेदातु (Mekedatu) बांध परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री जोसेफ विजय और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की सरकारों के रुख और फैसलों पर सवाल उठाए, जिससे सदन का माहौल गर्म हो गया।
मेकेदातु बांध पर सरकार से जवाब मांगते दिखे उदयनिधि स्टालिन
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने राज्य सरकार से पूछा कि कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को रोकने के लिए अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि तमिलनाडु के किसानों और राज्य के जल अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह इस परियोजना का विरोध किस स्तर पर कर रही है।
मुख्यमंत्री विजय ने दिया जवाब
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने मेकेदातु परियोजना के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तमिलनाडु की आपत्तियों से अवगत कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के किसानों और तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
पुरानी सरकारों की भूमिका पर भी हुई चर्चा
बहस के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि अतीत में पूर्ववर्ती सरकारों के समय लिए गए कुछ निर्णयों ने भी इस विवाद को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई थी।
इसके जवाब में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि वर्तमान सरकार को अतीत का हवाला देने के बजाय मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति अपनानी चाहिए।
सर्वदलीय बैठक को लेकर भी उठे सवाल
उदयनिधि स्टालिन ने मेकेदातु मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी बात रख रहे हैं, जबकि तमिलनाडु में भी सभी दलों को साथ लेकर एक साझा रणनीति बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि यदि कर्नाटक अपने हितों की रक्षा के लिए राजनीतिक मतभेद भुलाकर एक मंच पर आ सकता है, तो तमिलनाडु में भी ऐसी पहल क्यों नहीं की जा रही।
बेंगलुरु दौरे को लेकर भी हुआ विवाद
विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री विजय के संभावित बेंगलुरु दौरे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मुख्यमंत्री के कर्नाटक जाने की खबर सामने आई, लेकिन बाद में विवाद बढ़ने पर इस योजना से इनकार कर दिया गया।
इस पर सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई, हालांकि पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि मुख्यमंत्री की कर्नाटक यात्रा पर विचार किया गया था।
कर्नाटक की ओर से क्या कहा गया?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात को फिलहाल टालने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि कावेरी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों में संवेदनशील माहौल है और ऐसे समय में बैठक उचित नहीं होगी।
बताया गया कि उन्होंने भविष्य में अनुकूल परिस्थितियों में मुलाकात का सुझाव दिया और कावेरी बेसिन के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का संयुक्त दौरा करने की बात भी कही।
मेकेदातु परियोजना क्यों है विवाद का कारण?
मेकेदातु बांध परियोजना कर्नाटक की प्रस्तावित जलाशय योजना है, जिसका उद्देश्य पेयजल आपूर्ति और जल भंडारण क्षमता बढ़ाना बताया जाता है। वहीं तमिलनाडु का कहना है कि इस परियोजना से कावेरी नदी के जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे राज्य के किसानों और सिंचाई व्यवस्था पर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
इसी कारण यह मुद्दा लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।








