झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों को लेकर जारी छात्रों का आंदोलन अब नए चरण में पहुंच गया है। राज्य सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार के साथ वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। हालांकि छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत बंद कमरे में नहीं होगी, बल्कि मीडिया और कैमरों की मौजूदगी में ही की जाएगी।
पिछले 13 दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और पूरी भर्ती प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
विवाद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि परीक्षा के आयोजन और मूल्यांकन प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां हुईं। उनका आरोप है कि परीक्षा का संचालन एक निजी एजेंसी के माध्यम से कराया गया, जिसके चलते पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
छात्रों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो योग्य उम्मीदवारों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
छात्रों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे छात्र कई अहम मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं—
- JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
- पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।
- राज्य की भर्ती परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं।
- भविष्य की परीक्षाओं में पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था लागू की जाए।
सरकार ने बातचीत का दिया प्रस्ताव
बढ़ते आंदोलन को देखते हुए झारखंड सरकार ने छात्रों से बातचीत की पहल की है। रांची के उप-मंडल पदाधिकारी (SDO) ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल बनाने का अनुरोध किया था। इसके बाद छात्रों ने 11 सदस्यीय टीम का गठन कर उसकी सूची प्रशासन को सौंप दी।
इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं—
- 8 छात्र प्रतिनिधि
- 1 अधिवक्ता
- 2 तकनीकी विशेषज्ञ
अब वार्ता का समय और स्थान राज्य सरकार तय करेगी।
कैमरों की मौजूदगी में ही होगी वार्ता
प्रदर्शनकारी छात्रों ने साफ कहा है कि वे बंद कमरे में बातचीत नहीं करेंगे। उनका कहना है कि पूरी वार्ता पत्रकारों और कैमरों की मौजूदगी में होनी चाहिए ताकि बातचीत की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे और किसी भी तरह की गलतफहमी की स्थिति न बने।
भूख हड़ताल जारी
छात्र नेता देवेंद्र महतो पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल परीक्षा रद्द कराना नहीं, बल्कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया में स्थायी सुधार सुनिश्चित करना है।
जांच में अब तक क्या हुआ?
परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच फिलहाल विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है, जिसमें अपराध अनुसंधान विभाग (CID) भी शामिल है। जांच एजेंसियों ने अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या?
अब सभी की नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली बैठक पर है। यदि वार्ता में कोई ठोस समाधान निकलता है तो लंबे समय से चल रहा आंदोलन समाप्त हो सकता है। वहीं, यदि छात्रों की मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।








