महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक गणपति मंदिर के दान को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा मंदिर में हर साल करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाए जाने के बाद राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मामले की विशेष जांच (स्पेशल ऑडिट) कराने का फैसला किया है।
राज्य सरकार के निर्देश पर अब मंदिर में पिछले पांच वर्षों के दौरान प्राप्त नकद दान, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं का विस्तृत ऑडिट किया जाएगा। इस जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता को सौंपी गई है, जो पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे।
क्या है पूरा मामला?
मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले मंदिरों में गिना जाता है। हाल ही में राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंदिर में मिलने वाले दान के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
उन्होंने दावा किया कि मंदिर में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये के दान में कथित रूप से चोरी होती रही। उनके इस बयान के बाद मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार दोनों सक्रिय हो गए।
सरकार ने दिए जांच के निर्देश
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि विशेष ऑडिट में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसी मुद्दे पर सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सर्वणकर ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी भी दी।
राज ठाकरे ने क्या कहा?
एक कार्यक्रम में बोलते हुए राज ठाकरे ने दावा किया कि उन्हें मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की ओर से जानकारी मिली थी कि दान पेटी से धन की कथित चोरी हो रही थी।
उन्होंने कहा कि जब ट्रस्ट ने इस मामले पर निगरानी बढ़ाई और कथित रूप से कुछ कर्मचारियों को पकड़ा गया, तो मंदिर की साप्ताहिक दान राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।
राज ठाकरे का दावा था कि पहले मंदिर में हर सप्ताह 50 लाख रुपये से कम दान दर्ज होता था, लेकिन निगरानी के बाद यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपये प्रति सप्ताह तक पहुंच गया। इसी आधार पर उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा था।
ट्रस्ट ने आरोपों पर दी सफाई
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सर्वणकर ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मंदिर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि जब उन्हें कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी, तब उन्होंने स्वयं इस मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के सामने उठाया था। इसके बाद संबंधित एजेंसी ने निगरानी बढ़ाई और आवश्यक कार्रवाई करते हुए संदिग्ध लोगों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की।
ट्रस्ट का कहना है कि वह जांच में पूरी तरह सहयोग करेगा और सभी वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।
ऑडिट में किन बिंदुओं की होगी जांच?
विशेष ऑडिट के दौरान निम्नलिखित पहलुओं की समीक्षा की जाएगी—
- पिछले पांच वर्षों में प्राप्त नकद दान का रिकॉर्ड।
- मंदिर में चढ़ाए गए सोने, चांदी और अन्य आभूषणों का हिसाब।
- दान पेटियों की संग्रह और गणना प्रक्रिया।
- वित्तीय लेनदेन और रिकॉर्ड की पारदर्शिता।
- ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी व्यवस्था।
आगे क्या होगा?
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी, लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।








