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आयुष्मान भारत के 8 साल: गुमला में गरीब परिवारों के लिए इलाज का सहारा बना योजना का कार्ड

बीमारी के महंगे इलाज की चिंता हुई कम, सदर अस्पताल में पात्र मरीजों को मिल रही योजना के तहत उपचार की सुविधा

गुमला, 23 सितंबर। किसी गरीब परिवार के सामने अचानक गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति आ जाए तो इलाज का खर्च बड़ी चिंता बन जाता है। ऐसे समय में सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक राहत का माध्यम बनती हैं। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के आठ वर्ष पूरे होने के मौके पर गुमला में भी इसके लाभार्थियों के अनुभव सामने आ रहे हैं, जहां पात्र परिवार आयुष्मान कार्ड के माध्यम से अस्पताल में उपचार की सुविधा का लाभ ले रहे हैं।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को रांची, झारखंड से हुई थी। योजना के तहत पात्र परिवारों को माध्यमिक और तृतीयक स्तर के अस्पताल में भर्ती संबंधी उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध कराया जाता है। सरकारी जानकारी के अनुसार यह सुविधा पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों के माध्यम से कैशलेस उपचार के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।

गुमला में मरीजों के लिए आर्थिक राहत का माध्यम

गुमला सदर अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों और उनके परिजनों के लिए आयुष्मान कार्ड केवल एक पहचान-पत्र नहीं, बल्कि बीमारी के समय आर्थिक बोझ को कम करने का माध्यम बना हुआ है। खासकर ऐसे परिवार जिनकी आय सीमित है, उनके लिए अस्पताल में होने वाले इलाज का खर्च जुटाना मुश्किल हो सकता है।

इसी स्थिति का सामना कर रही चंदा देवी अपने बेटे का इलाज करा रही हैं। उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। ऐसे में आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज की सुविधा मिलने से उन्हें उपचार के खर्च को लेकर होने वाली चिंता से काफी राहत मिली है।

चंदा देवी के अनुभव से यह समझा जा सकता है कि गंभीर बीमारी के समय इलाज के साथ-साथ परिवार के सामने आर्थिक व्यवस्था की चुनौती भी होती है। योजना का लाभ मिलने पर ऐसी स्थिति में परिवार का ध्यान इलाज और मरीज की देखभाल पर केंद्रित रह सकता है।

इलाज का पूरा खर्च उठाना होता तो बढ़ती परेशानी

गुमला सदर अस्पताल में उपचार करा रहे अन्य मरीजों के परिजन भी आयुष्मान कार्ड को आर्थिक राहत से जोड़कर देखते हैं। योजना के लाभार्थी अमित उरांव और ललकु खेरवार के अनुसार, यदि अस्पताल में होने वाले इलाज का पूरा खर्च परिवार को अपनी जेब से उठाना पड़ता, तो इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता।

सीमित आय वाले परिवारों के लिए बीमारी के दौरान दवा, जांच, अस्पताल में भर्ती और उपचार से जुड़े दूसरे खर्च एक साथ सामने आ सकते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य बीमा कवर का लाभ परिवार को अतिरिक्त आर्थिक दबाव से बचाने में मदद करता है।

दस्तावेज सत्यापन के बाद मिलती है उपचार की सुविधा

गुमला सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर के अनुसार, पात्र मरीजों के आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किए जाने के बाद आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

इस प्रक्रिया में लाभार्थी की पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होती है। पात्र मरीज को योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार सूचीबद्ध उपचार का लाभ दिया जाता है।

वहीं, आयुष्मान भारत की जिला समन्वयक डॉ. मोनिका के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में राशन कार्डधारी परिवारों को योजना के दायरे में लाया जा चुका है। इसके साथ ही जो पात्र परिवार अभी योजना से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी इसके दायरे में लाने का काम जारी है।

बीमारी के साथ आर्थिक चिंता कम करने की कोशिश

आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का उद्देश्य केवल अस्पताल में इलाज उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि बीमारी के कारण परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना भी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, AB-PMJAY के तहत 30 जून 2026 तक देशभर में 12.69 करोड़ अस्पताल में भर्ती अधिकृत की गई थीं, जिनकी कुल राशि करीब ₹1.92 लाख करोड़ थी। योजना के लिए देशभर में 37,000 से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल सूचीबद्ध थे।

23 सितंबर 2026 को योजना के आठ वर्ष पूरे होने पर जारी सरकारी जानकारी में बताया गया कि 31 अगस्त 2026 तक योजना के तहत करीब 13.25 करोड़ अस्पताल में भर्ती मामलों के लिए उपचार स्वीकृत हुआ और सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या 38,000 से अधिक हो गई।

गुमला में जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर

गुमला जैसे जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और इलाज के खर्च को लेकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं। ऐसे में पात्र लोगों तक योजना की जानकारी पहुंचाना और उन्हें आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

अस्पताल स्तर पर दस्तावेज सत्यापन और पात्रता की प्रक्रिया के जरिए लाभार्थियों को योजना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अभी भी जो पात्र परिवार योजना से बाहर हैं, उन्हें जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।

आठ साल बाद भी योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक सुरक्षा

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत ऐसे समय में हुई थी जब बड़ी संख्या में परिवारों के लिए गंभीर बीमारी का इलाज घरेलू बचत पर भारी पड़ सकता था। योजना के तहत पात्र परिवारों को ₹5 लाख तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवर देने का प्रावधान किया गया है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह कवर माध्यमिक और तृतीयक स्तर की सूचीबद्ध अस्पताल सेवाओं के लिए है।

गुमला में चंदा देवी और अन्य लाभार्थियों के अनुभव बताते हैं कि किसी परिवार के लिए बीमारी सिर्फ स्वास्थ्य की समस्या नहीं होती, बल्कि उसके साथ आर्थिक चुनौती भी जुड़ी होती है। ऐसे में आयुष्मान कार्ड के जरिए उपचार का लाभ मिलना जरूरतमंद परिवारों के लिए मुश्किल समय में आर्थिक सहारा बन सकता है।

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