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मंच पर मुख्यमंत्री से लेकर कांग्रेस विधायक तक के हाथ में पहुंचा ‘वही’ पतंजलि घी, फिर स्वामी रामदेव ने जो कहा…

जब स्वामी रामदेव ने मुख्यमंत्री को थमाया पतंजलि का घी और कहा, ‘आप भी चेक करा लो’

मौका था विश्व आयुर्वेद दिवस का और अवसर था देश ही नहीं, दुनिया के पहले पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम के उद्घाटन का। हरिद्वार के योग ग्राम स्थित औरंगाबाद में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आयुष मंत्री मदन कौशिक, विधायक आदेश चौहान, विधायक रवि बहादुर सहित कई राजनेता और संतगण मौजूद थे। माहौल पूरी तरह दिव्य और आध्यात्मिक था।

यह कितनी बड़ी उपलब्धि है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी भारत सरकार द्वारा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच के अनुरूप इस तरह की शिक्षा प्रणाली को लेकर हाल ही में शासनादेश जारी ही किया गया है, लेकिन योग ग्राम में योग और आयुर्वेद का डंका बजाने वाले दो मनीषियों स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने इसे जमीन पर भी उतार दिया।

मंच पर अचानक हुआ एक दिलचस्प वाकया

बहरहाल, इस दिव्य और आध्यात्मिक रूपरेखा के बीच एक ऐसा दिलचस्प वाकया हुआ, जिसने पूरे आयोजन को एक अलग ही रंग और रोमांच से भर दिया।

जब प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भाषण देने के लिए आमंत्रित किया जाने वाला था, उससे ठीक पहले स्वामी रामदेव ने उन्हें पतंजलि का गाय का घी उपहार स्वरूप देकर मंच और दर्शक दीर्धा में जबरदस्त कौतूहल मचा दिया।

मुख्यमंत्री को घी देना अपने आप में कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन अगले ही पल यह सामान्य-सा लगने वाला उपहार एक गहरे संदेश में तब्दील हो गया।

आयुष मंत्री और भाजपा-कांग्रेस दोनों विधायकों को भी दिया घी

स्वामी रामदेव ने यही घी आयुष मंत्री मदन कौशिक, भाजपा के रानीपुर से विधायक आदेश चौहान और ज्वालापुर से कांग्रेस पार्टी के विधायक रवि बहादुर को भी सौंप दिया।

यानी मंच पर सरकार भी थी, सरकार के मंत्री भी थे, सत्ता पक्ष (भाजपा) भी थी और विपक्ष की कांग्रेस भी। और फिर स्वामी रामदेव ने वह बात कह दी, जिसने इस पूरे प्रसंग को सुर्खियों में ला दिया।

‘आप भी इसे चेक करा लो…’

बीते दिनों से पतंजलि के देशी घी पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर स्वामी रामदेव ने एक तरह से हंसते-हंसते खुली चुनौती ही दे दी।

बोले, “लो मुख्यमंत्री जी, आपको पतंजलि का घी उपहार स्वरूप दे रहे हैं, आप भी इसे चेक करा लो।”

फिर मंच पर मौजूद भाजपा और कांग्रेस दोनों के विधायकों की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘यहां तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों के विधायक भी मौजूद हैं, उन्हें भी घी दिया है, कहा, बीजेपी और कांग्रेस वालों दोनों की तरफ से चेक करवा लियो रे।’

बात कहने का अंदाज बिल्कुल सहज था, चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन संदेश बिलकुल साफ और तीखा था।

जिस घी को लेकर बाहर सवाल उठाए जा रहे थे, उसी घी को स्वामी रामदेव ने ऐसे मंच पर सरेआम रख दिया, जहां सरकार के मुखिया से लेकर मंत्री और सत्ता-विपक्ष दोनों दलों के जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

पतंजलि घी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच दिया संदेश

जाहिर है, विश्व आयुर्वेद दिवस पर एक ओर जहां पतंजलि की ओर से ऐतिहासिक पहल की गई, वहीं पतंजलि घी का विरोध और बार-बार झूठा प्रचार करके उसे कठघरे में खड़ा करने वालों को सार्वजनिक मंच से स्वामी रामदेव ने करारा जवाब दे दिया।

इससे यह साफ जाहिर होता है कि पतंजलि घी को लेकर स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण का यह दावा कि ‘पतंजलि को बदनाम करने वाले षड्यंत्रकारी हैं’, इसमें कहीं न कहीं दम जरूर है।

स्वामी रामदेव इससे पहले अपनी यू-ट्यूब लाइव स्ट्रीमिंग और अन्य मंचों से भी पतंजलि के घी पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों ले चुके हैं, लेकिन आज तो उन्होंने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विपक्ष के विधायक तक को घी थमाकर खुलेआम उसकी शुद्धता की जांच कराने की बात कह दी।

सिर्फ घी का पैकेट नहीं, एक बड़ा संदेश

वास्तव में, इस पूरे घटनाक्रम को केवल घी के एक पैकेट के उपहार के रूप में देखना इस दृश्य के पूरे अर्थ को छोटा कर देना होगा।

जिस मंच पर पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम के रूप में एक महान सोच को जमीन पर उतारने की घोषणा हो रही थी, उसी मंच पर पतंजलि के घी को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब भी अपने ही बेबाक अंदाज में दिया जा रहा था।

स्वामी रामदेव की यह बोल्ड पहल निश्चित तौर पर अनायास नहीं थी, बल्कि दूर बैठकर पतंजलि को नीचा दिखाने का सपना देखने वालों को यह सीधा और दो टूक जवाब था।

और शायद इसीलिए इस पूरे प्रसंग की सबसे दिलचस्प बात घी देना नहीं, बल्कि उसे देते हुए कही गई वह छोटी-सी लाइन थी—‘आप भी इसे चेक करा लो।’

विश्व आयुर्वेद दिवस के मंच पर चर्चा में आया घी

अब इस दृश्य को कोई महज एक शिष्टाचार उपहार माने या एक सार्वजनिक चुनौती के तौर पर देखे, लेकिन इतना तय है कि विश्व आयुर्वेद दिवस के उस ऐतिहासिक मंच पर स्वामी रामदेव ने पतंजलि के घी को लेकर चल रही बहस को दबाने के बजाय, उसे खुद मंच पर बुलाकर अपने ही चिर-परिचित अंदाज में चित्त कर दिया।

और यही शायद इस पूरे आयोजन की वह छोटी-सी घटना थी, जो एक बड़े उद्घाटन के बीच अचानक एक बड़ी और दिलचस्प कहानी बन गई।

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