नाग पंचमी 2026: आज है नाग देवता की पूजा का पावन पर्व, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व महाराष्ट्र के हॉस्टल में ‘भूत’ की अफवाह से हड़कंप, 600 आदिवासी छात्रों ने छोड़ा स्कूल; लड़कियों के अजीब व्यवहार से फैली दहशत अंबेडकरनगर में IPS अधिकारी की 95 वर्षीय मां की हत्या? घर से जेवर गायब, पुलिस जांच में जुटी भारत की आजादी पर ईरान का खास संदेश, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रिश्तों को बताया बड़ी ताकत विमल इलायची विज्ञापन पर महाराष्ट्र FDA सख्त, शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस वाराणसी एयरपोर्ट पर पिस्टल से अचानक चली गोली, दो सुरक्षा कर्मी घायल; मुंबई जाने वाली फ्लाइट के यात्री से जुड़ा मामला

महाराष्ट्र के हॉस्टल में ‘भूत’ की अफवाह से हड़कंप, 600 आदिवासी छात्रों ने छोड़ा स्कूल; लड़कियों के अजीब व्यवहार से फैली दहशत

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में एक सरकारी आदिवासी आवासीय विद्यालय इन दिनों अजीबोगरीब घटनाओं और अफवाहों के कारण चर्चा में है। यहां करीब 600 छात्र-छात्राओं ने हॉस्टल छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि कुछ छात्राओं के असामान्य व्यवहार के बाद हॉस्टल में ‘भूत’ और ‘आत्मा’ होने की अफवाह तेजी से फैल गई।

हालांकि, अधिकारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन घटनाओं को किसी अलौकिक शक्ति से जोड़ने से इनकार किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे मानसिक तनाव, डर और सामूहिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव जैसी वजहें हो सकती हैं।

चार छात्राओं के अजीब व्यवहार से शुरू हुआ मामला

यह पूरा मामला 22 जुलाई को सामने आया, जब चार छात्राएं अचानक असामान्य तरीके से व्यवहार करने लगीं। अधिकारियों के मुताबिक, छात्राएं लगातार रोने और हंसने लगीं और उनका व्यवहार सामान्य नहीं था।

घटना की जानकारी अन्य छात्रों तक पहुंची तो हॉस्टल में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ छात्रों का दावा था कि छात्राओं पर किसी ‘आत्मा’ का साया है। देखते ही देखते यह बात पूरे परिसर में फैल गई और कई छात्र डरने लगे।

810 छात्रों वाले स्कूल में मचा हड़कंप

यह आवासीय विद्यालय अमरावती जिले के चिखलदरा तालुका के डोमा गांव में स्थित है। यह इलाका आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र में आता है। अधिकारियों के अनुसार, स्कूल के हॉस्टल में करीब 810 लड़के और लड़कियां रहते हैं।

अफवाह फैलने के बाद कुछ ही दिनों में करीब 600 छात्र-छात्राएं हॉस्टल छोड़कर अपने घर चले गए। इससे स्कूल प्रशासन के सामने छात्रों को वापस लाने और उनके डर को दूर करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

छात्राओं ने पायल की आवाज सुनने का किया दावा

हॉस्टल से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, कुछ छात्राओं ने दावा किया कि उन्हें रात में पायल या घुंघरू जैसी आवाजें सुनाई देती थीं। इसके बाद हॉस्टल में मौजूद डर और बढ़ गया।

हालांकि, ऐसी आवाजों या कथित घटनाओं की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताई मानसिक तनाव की संभावना

मामले की गंभीरता को देखते हुए जनजातीय विकास विभाग की ओर से स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम स्कूल भेजी गई। अधिकारियों के मुताबिक, विशेषज्ञों ने छात्राओं की स्थिति का जायजा लिया।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छात्राओं में दिखाई दे रहे लक्षणों का किसी भी तरह की अलौकिक गतिविधि से संबंध नहीं है। विशेषज्ञों ने इसे मानसिक तनाव से जुड़ी हिस्टीरिया जैसी स्थिति होने की संभावना जताई है।

मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में भी डर, तनाव, अंधविश्वास और स्थानीय मान्यताओं को इस पूरे घटनाक्रम को बढ़ाने वाली वजहों में शामिल किया गया है।

‘महुआ के पेड़’ से लेकर मंदिर तक की अलग-अलग मान्यताएं

अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद स्कूल और आसपास के इलाके में कई तरह की कहानियां और धारणाएं सामने आने लगीं।

स्थानीय लोगों और कुछ छात्रों के बीच यह मान्यता बताई गई कि स्कूल परिसर में पहले एक महुआ का पेड़ था, जहां कथित तौर पर आत्माओं के रहने की बात कही जाती थी। स्कूल प्रबंधन ने पेड़ को कटवा दिया, जिसके बाद कुछ लोगों ने यह धारणा बना ली कि आत्माएं नाराज होकर छात्रों को परेशान कर रही हैं।

एक अन्य स्थानीय धारणा स्कूल के पीछे स्थित देवी-देवता के मंदिर से जुड़ी थी। कुछ लोगों का कहना था कि स्कूल की ड्रेनेज लाइन के कारण मंदिर का हिस्सा प्रभावित या अतिक्रमित हुआ, जिससे देवी नाराज हो गईं।

इसके अलावा एक आदिवासी युवक की स्कूल के पास खेत में मौत को लेकर भी ऐसी ही अफवाह सामने आई कि उसकी आत्मा भटक रही है।

गांव की कुछ महिलाओं में भी दिखे ऐसे लक्षण

मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि बाद में गांव की कुछ महिलाओं में भी इसी तरह के मानसिक लक्षण दिखाई देने लगे। अधिकारियों के अनुसार, इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि डर, तनाव और सामूहिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव घटना को बढ़ा रहे थे।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि ऐसी घटनाओं को डर और अंधविश्वास के नजरिए से देखने के बजाय वैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है।

अंधविश्वास निर्मूलन समिति ने छात्रों की काउंसलिंग की

महाराष्ट्र में अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाली महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी छात्रों से मुलाकात की और उनकी काउंसलिंग की।

उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और घटना को वैज्ञानिक नजरिए से समझें। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों के डर को दूर करने और उन्हें दोबारा पढ़ाई से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सांसद ने भी छात्रों से की अपील

अमरावती के सांसद बलवंत वानखड़े ने भी छात्रों से डरने की बजाय स्कूल वापस लौटने और अपनी पढ़ाई जारी रखने की अपील की है।

स्कूल के प्रधानाचार्य संजय चौधरी ने बताया कि छात्राओं की काउंसलिंग की जा रही है और उन्हें दोबारा स्कूल लाने के प्रयास जारी हैं। उनके मुताबिक, कुछ छात्राएं वापस भी लौट चुकी हैं।

क्या है पूरे मामले की असली वजह?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर हॉस्टल में किसी तरह की paranormal या अलौकिक गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि मानसिक तनाव, डर, अफवाह, स्थानीय मान्यताएं और सामूहिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव छात्रों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रशासन का प्रयास है कि छात्रों और उनके परिवारों के बीच फैले डर को दूर किया जाए और सभी बच्चे जल्द से जल्द स्कूल लौटकर अपनी पढ़ाई शुरू करें।

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