22 अगस्त 2026: भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लेकर भारतीय वायुसेना के पूर्व उप प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। हाल ही में सेवानिवृत्त हुए एयर मार्शल कपूर का मानना है कि अगर Tejas Mk-2 बड़ी संख्या में 2030 के दशक के मध्य में भारतीय वायुसेना में शामिल होता है, तो उस समय की आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
एक चर्चा के दौरान जब उनसे पूछा गया कि चीन के पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने के बीच भारत के लिए चौथी पीढ़ी के विमान को 2035 के आसपास शामिल करना कितना उपयोगी होगा, तो उन्होंने इसे लेकर स्पष्ट असहमति जताई।
पांचवीं और छठी पीढ़ी के विमानों की ओर बढ़ रही दुनिया
आधुनिक लड़ाकू विमानों में स्टील्थ तकनीक, बेहतर सेंसर, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पांचवीं पीढ़ी के विमानों में स्टील्थ और सेंसर फ्यूजन जैसी क्षमताएं प्रमुख हैं, जबकि अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म मानव रहित ड्रोन के साथ मिलकर काम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियों पर अधिक निर्भर हो सकते हैं।
एयर मार्शल कपूर का तर्क है कि भारत को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी लड़ाकू विमान क्षमता विकसित करनी होगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि Tejas Mk-2 जैसे विमान पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं होंगे। उनके मुताबिक, अत्याधुनिक पांचवीं और छठी पीढ़ी के विमानों की संख्या सीमित होने की स्थिति में चौथी या 4.5 पीढ़ी के विमान उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं, जहां हर जगह सबसे उन्नत लड़ाकू विमान तैनात करना संभव नहीं होगा।
Tejas Mk-1A की डिलीवरी को लेकर भी चिंता
पूर्व IAF उप प्रमुख ने Tejas Mk-1A की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि वायुसेना को जिन विमानों की आवश्यकता है, उनकी आपूर्ति में देरी गंभीर विषय है।
Tejas Mk-1A के लिए भारत ने 2021 में 83 विमानों का ऑर्डर दिया था। इसके बाद 2025 में 97 और विमानों के लिए एक और बड़ा ऑर्डर सामने आया। हालांकि, विमानों की डिलीवरी की गति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
इस कार्यक्रम में इंजन की उपलब्धता के साथ-साथ विमान के विभिन्न सिस्टम के एकीकरण से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है।
HAL की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
एयर मार्शल कपूर ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन जरूरी है, लेकिन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ते हुए विकास और डिलीवरी की समयसीमा पर भी ध्यान देना चाहिए।
Tejas Mk-2 की पहली उड़ान में देरी
Tejas Mk-2 को Tejas परिवार का अधिक उन्नत संस्करण माना जाता है। इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना की मध्यम श्रेणी के लड़ाकू विमानों की जरूरत को पूरा करना है।
परियोजना की समयसीमा में कई बार बदलाव हुआ है। शुरुआती योजना के मुकाबले प्रोटोटाइप की पहली उड़ान में देरी हुई है। उपलब्ध नवीनतम जानकारी के अनुसार, Tejas Mk-2 की पहली उड़ान 2027 में होने की उम्मीद जताई गई है।
AMCA पर भी निगाहें
भारत के भविष्य के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह भारत का स्वदेशी स्टील्थ फाइटर प्रोग्राम है और इसके जरिए देश पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू विमान क्षमता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
एयर मार्शल कपूर का सुझाव है कि भारत को केवल घरेलू परियोजनाओं तक सीमित रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में साझेदारी के विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने यूरोप के FCAS (Future Combat Air System) और ब्रिटेन, इटली तथा जापान के GCAP (Global Combat Air Programme) जैसे कार्यक्रमों का उदाहरण दिया।
आत्मनिर्भरता के साथ समय पर डिलीवरी भी जरूरी
पूर्व वायुसेना उप प्रमुख की टिप्पणियों का मुख्य संदेश यह है कि भारत के लिए स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाना रणनीतिक रूप से जरूरी है, लेकिन तेजी से बदलती सैन्य तकनीक के दौर में विकास की गति और समय पर डिलीवरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
भारत इस समय Tejas Mk-1A, Tejas Mk-2 और AMCA जैसे अलग-अलग स्तर के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। ऐसे में इन परियोजनाओं की समयसीमा और तकनीकी क्षमताएं आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना की ताकत को प्रभावित करने वाली अहम चीजें होंगी।







