कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए एक अलग तरह की रणनीति पर काम करते नजर आ रहे हैं। छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में चल रहे ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों के दौरान उनका पहनावा भी चर्चा का विषय बन गया है।
राहुल गांधी के सार्वजनिक जीवन में टी-शर्ट का इस्तेमाल नया नहीं है। 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्होंने लगातार सफेद टी-शर्ट पहनकर लंबी पदयात्रा की थी। यात्रा के गर्मी और सर्दी दोनों चरणों में उनका यह कैजुअल लुक लगातार नजर आया।
इसके बाद भी कई राजनीतिक कार्यक्रमों और दौरों में राहुल गांधी टी-शर्ट में दिखाई देते रहे। उनके इस पहनावे को लेकर राजनीतिक विरोधियों की ओर से कई बार सवाल भी उठाए गए। बीजेपी नेताओं ने उनके कैजुअल अंदाज को लेकर उन्हें निशाना बनाया, लेकिन राहुल गांधी ने अपने पहनावे में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया।
अब रंगीन शर्ट पर जोर
हाल के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों में राहुल गांधी का अंदाज पहले की तुलना में थोड़ा अलग दिखाई दे रहा है। अलग-अलग शहरों में वह अलग रंगों की शर्ट और टी-शर्ट में नजर आए हैं। इसे युवा वर्ग, खासकर Gen Z तक संवाद स्थापित करने की कांग्रेस की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
कोटा में पेपर लीक के मुद्दे पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी नीले रंग की शर्ट में दिखाई दिए। इसके बाद देहरादून में भी उनका लुक पहले के मुकाबले अलग नजर आया।
प्रयागराज में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने गुलाबी रंग की शर्ट पहनी, जिसकी सोशल मीडिया पर भी चर्चा हुई। वहीं पुणे में आयोजित कार्यक्रम में वह पीले रंग की शर्ट में नजर आए।
छात्रों और महिलाओं पर फोकस
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों में पेपर लीक, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। पुणे के कार्यक्रम में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई। इसमें महिलाओं की सुरक्षा, अधिकार और स्वतंत्रता जैसे मुद्दे शामिल रहे।
कांग्रेस की रणनीति में युवा और महिला मतदाताओं पर विशेष ध्यान दिखाई दे रहा है। आने वाले वर्षों में पहली बार मतदान करने वाली Gen Z आबादी चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे में राजनीतिक दल इस वर्ग के साथ सीधे संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी का बदलता पहनावा इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित यह अभियान कांग्रेस को राजनीतिक स्तर पर कितना फायदा पहुंचाता है।








