राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 50 साल पुरानी एक इमारत के अचानक ढहने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 अन्य लोग घायल बताए गए हैं। शुरुआती जांच में इमारत के बेसमेंट में चल रहे मरम्मत कार्य और वहां जमा पानी को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान एक पिलर की स्थिरता प्रभावित हुई। बताया जा रहा है कि संरचना के भीतर यह कमजोरी धीरे-धीरे बढ़ी और आखिरकार पूरी इमारत भरभराकर नीचे आ गिरी।
हादसे के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबे में फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू किया गया। बचाव अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में मलबा हटाया गया।
बेसमेंट में पानी जमा होने की बात सामने आई
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को हादसे को लेकर प्रारंभिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 80 प्रतिशत मलबा हटाया जा चुका है, जबकि बेसमेंट का मलबा अभी साफ किया जाना बाकी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, शुरुआती जांच में बेसमेंट में पानी जमा होने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि पुराने ढांचे में चल रहे मरम्मत कार्य के साथ पानी का जमा होना इमारत की संरचना पर असर डाल सकता है और इसी के चलते हादसा हुआ होने की आशंका है।
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि बेसमेंट में पानी मौजूद था और पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान पानी जमा होने की स्थिति ने ढांचे को कमजोर किया। हालांकि, हादसे की पूरी वजह स्पष्ट करने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है।
पिलर की कमजोरी बनी अहम कड़ी
प्रारंभिक जानकारी में जिस पिलर के अस्थिर होने की बात सामने आई है, वह हादसे की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। यदि मरम्मत के दौरान किसी महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्से की मजबूती प्रभावित हुई हो, तो इसका असर पूरी इमारत की स्थिरता पर पड़ सकता है।
फिलहाल संबंधित एजेंसियां मलबा हटाने और हादसे के कारणों की जांच में जुटी हैं। यह भी देखा जा रहा है कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी और मरम्मत कार्य किस तरीके से किया जा रहा था।
पुराने भवनों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
सत्य निकेतन की इस घटना ने दिल्ली में पुराने भवनों की सुरक्षा और उनमें होने वाले निर्माण या मरम्मत कार्यों की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने भवनों में किसी भी तरह के संरचनात्मक बदलाव या मरम्मत से पहले उनकी स्थिति का तकनीकी आकलन बेहद जरूरी होता है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इमारत गिरने के पीछे पानी, मरम्मत कार्य, कमजोर पिलर या अन्य कोई संरचनात्मक कारण कितना जिम्मेदार था।








