विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की जरूरत को लेकर एल-69 समूह की उच्चस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की। न्यूयॉर्क में हुई इस बैठक में सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैपटिस्ट भी उनके साथ सह-अध्यक्ष रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया में तेजी से हो रहे अभूतपूर्व बदलावों का सबसे अधिक प्रभाव ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच संयुक्त राष्ट्र कई देशों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है।
सुरक्षा परिषद की भूमिका पर उठाए सवाल
विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के सामने मौजूद खतरों से प्रभावी तरीके से निपटने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सीमाएं उसकी संरचना में सुधार की आवश्यकता को सामने लाती हैं। उन्होंने सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी को भी चिंता का विषय बताया।
जयशंकर ने कहा कि सुधारों को लंबे समय तक टालते रहने से मौजूदा असमानताएं बनी रहती हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विकासशील देशों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
L-69 और C-10 साथ मिलकर कर रहे हैं प्रयास
विदेश मंत्री ने कहा कि एल-69 और सी-10 समूह के सदस्य सुरक्षा परिषद में सुधार के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन देशों का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना है।
क्या है L-69 समूह?
एल-69 विकासशील देशों का एक अंतर-क्षेत्रीय समूह है, जिसमें अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन तथा प्रशांत क्षेत्र के देश शामिल हैं। यह समूह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग को लेकर काम करता है।
वहीं, C-10 अफ्रीकी देशों का समूह है, जो सुरक्षा परिषद में अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधित्व से जुड़े साझा मुद्दों को आगे बढ़ाता है। भारत लंबे समय से L-69 और अन्य सुधार समर्थक समूहों के साथ मिलकर UNSC सुधार के मुद्दे को उठाता रहा है।
जयशंकर की यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई, जहां भारत की ओर से सुरक्षा परिषद में सुधार और बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।








