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दिल्ली में शुरू हुआ देश का पहला सस्टेनेबल स्मार्ट गार्डन, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

नई दिल्ली | 25 जनवरी 2026

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और स्मार्ट टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली सरकार ने आज राजधानी में देश का पहला सस्टेनेबल स्मार्ट गार्डन शुरू करने की घोषणा की। यह परियोजना शहरी हरित क्षेत्र को मजबूत करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के जरिए पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है।

इस स्मार्ट गार्डन को पूरी तरह से एआई आधारित तकनीक पर तैयार किया गया है, जिसमें पौधों की देखभाल से लेकर जल प्रबंधन तक सब कुछ स्मार्ट सिस्टम के जरिए किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह गार्डन राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्र की समस्या से निपटने में मददगार साबित होगा।

दिल्ली के इस स्मार्ट गार्डन में ऐसे सेंसर लगाए गए हैं, जो मिट्टी की नमी, तापमान, हवा की गुणवत्ता और सूर्य प्रकाश की मात्रा को लगातार मॉनिटर करते रहेंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर पौधों को आवश्यकतानुसार पानी और पोषण दिया जाएगा, जिससे पानी की बर्बादी भी रोकी जा सकेगी।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि गार्डन की लाइटिंग व्यवस्था पूरी तरह सोलर एनर्जी पर आधारित है। रात के समय यह गार्डन सोलर पावर से जगमगाएगा, जिससे बिजली की खपत कम होगी और पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही, गार्डन में एक डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम भी लगाया गया है, जिस पर क्षेत्र का रियल-टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) देखा जा सकेगा।

पर्यावरण मंत्री ने इस मौके पर कहा कि सरकार का उद्देश्य दिल्ली को एक हरित और टिकाऊ शहर के रूप में विकसित करना है। उन्होंने बताया कि यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले समय में इसे दिल्ली के अन्य इलाकों में भी लागू किया जाएगा।

इस स्मार्ट गार्डन से आम लोगों को भी कई फायदे मिलने की उम्मीद है। स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ हवा, प्राकृतिक वातावरण और आरामदायक हरित स्थान मिलेगा। इसके अलावा, यह गार्डन छात्रों और युवाओं के लिए पर्यावरण जागरूकता और सस्टेनेबिलिटी एजुकेशन का भी एक केंद्र बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्मार्ट और सस्टेनेबल परियोजनाएं भविष्य में बड़े शहरों के लिए एक मॉडल साबित हो सकती हैं। दिल्ली का यह स्मार्ट गार्डन न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि तकनीक और प्रकृति के संतुलन की एक नई मिसाल भी पेश करेगा।

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