अचल हाथों के साथ जन्मी ओडिशा की बेटी ने पैरों से लिखी मैट्रिक परीक्षा, पेश की मिसाल

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ओडिशा की एक साहसी छात्रा ने अपने हौसले और जज़्बे से यह साबित कर दिया कि शारीरिक सीमाएं सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। जन्म से ही हाथों में हरकत न होने के बावजूद इस छात्रा ने मैट्रिक (दसवीं) की परीक्षा अपने पैरों से लिखकर सभी को प्रेरित किया है।

यह छात्रा ओडिशा के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती है। बचपन से ही उसके दोनों हाथ काम नहीं करते, लेकिन उसने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उसने पैरों से लिखने की कला सीखी। धीरे-धीरे उसने इतनी दक्षता हासिल कर ली कि वह सामान्य विद्यार्थियों की तरह तेजी और साफ-सुथरे ढंग से लिखने लगी।

परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्र पर मौजूद शिक्षक और अन्य छात्र उसके आत्मविश्वास को देखकर भावुक हो गए। छात्रा ने बिना किसी विशेष सहायता के पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने प्रश्नपत्र हल किए। उसके माता-पिता ने बताया कि उनकी बेटी बचपन से ही पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर रही है और हमेशा अच्छे अंक लाने का सपना देखती रही है।

स्कूल प्रशासन ने भी छात्रा की दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना की है। शिक्षकों का कहना है कि वह पढ़ाई में होनहार है और आगे चलकर उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती है। स्थानीय लोगों ने भी उसकी हिम्मत को सलाम किया है।

इस घटना ने यह संदेश दिया है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का संकल्प हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। ओडिशा की इस बेटी की कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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